हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुवानेकी ढाल ३६
चातुर्वर्ण्यव्यवस्था नहीं मानते पर इससे क्या वे म्लेच्छ या विदेशी
हो गये ? ईश्वर न करे ऐसा हो ! उनका और हमारा रक्त एक है,
जाति एक है, देश एक है, और ईश्वर तो एक है ही । इसकी
अपेक्षा अच्छी परिभाषा तो यही है कि
“तं वर्षं भारतं नाम भारती यत्र संततिः ॥”
हम हिन्दू सब एक हैं, एक ही जाति हैं, क्योंकि सबका रक्त
एक है—सब भारती संतति हैं।
इस समयके इतिहासमें, बौद्धमतके उत्थान और पतनके साथ
साथ भारतमें प्राकृत भाषाओंका बड़ी तेजीके साथ प्रचार और
विस्तार हो रहा था और संस्कृत केवल पण्डितोंकी भाषा हो रही थी,
यहां तक कि नवीन कल्पनाओं और नवीन नामोंका संस्कृतीकरण
करना पड़ता था और तब किसी प्रामाणिक ग्रन्थमें उन्हें स्थान
मिलता था । इससे समाजका नित्यनैमित्तिक जीवन प्रचलित
प्राकृतों द्वारा ही प्रकट होता था। फलतः सिन्धु और सिन्धुस्थान
शब्द कहीं कहीं संस्कृत ग्रन्थोंमें मिलते हैं सही, पर संस्कृत ले-
खक भारत शब्दको ही परंपरागत या अधिक प्रौढ़ मानते थे और
उसीका प्रयोग करते थे। इसी प्रकार प्राकृतोंमें देखिये तो 'भारत'
या 'आर्यावर्त' इन प्राचीन और प्रिय नामोंके स्थानमें सर्वत्र हिंदु-
स्थान ( सिन्धुस्थान ), इस प्रचलित और जीवित नामका प्रयोग
किया गया है। यहां यह पिष्टपेषण करनेकी आवश्यकता नहीं कि
संस्कृतका 'स' प्रायः प्राकृतमें 'ह' हो जाता है। इससे हम देखते
हैं, भारतके वर्तमान प्राकृत साहित्यमें सर्वत्र हिन्दुस्थान या