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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 53, कुल 167 में से

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हिन्दुस्थान और म्लेच्छस्थान ३७
नहीं जानते। यही भाव है जिससे हम आपकी पूजा करते हैं।
आपके शब्दोंका अभिप्राय हृदयंगम करनेमें हम असमर्थ हैं, पर
हम यह जानते हैं कि आप जो कहते हैं वही सत्य है; कारण
आपके शब्द ईश्वरके मुखसे निकले हुए हैं, और हमारे शब्द इस
जड़ जगतके कोलाहलके हैं। शायद आपने इस धरातलपर
अवतीर्ण होकर अपना झंडा फहरानेमें बहुत जल्दी की; क्योंकि
संसार अभी बच्चा है ! आपकी बातको वह नहीं समझता और
आपके प्रकाशसे उसकी आंखें चकाचौंध हो जाती हैं-वह आपके
उपदेशको पूर्णरूपमें अपनी दृष्टिके सामने नहीं रख सकता । जब-
तक संसारमें प्राणियोंके परस्पर व्यवहारका यही नियम चलता
है कि—
चलानामचला भक्ष्या दंष्ट्रिणामप्यदंष्ट्रिणः ।
अहस्तानां सहस्ताश्च शूराणां चैव भीरवः ॥ (मनु)
और यह इतना प्रत्यक्ष है कि आकाशमें चमकनेवाले नक्षत्रोंके
समान साधुताके मनोहर उपदेशोंके सुन्दर दृश्योंसे उसका अस्ति-
त्व कोई अस्वीकार नहीं कर सकता, तबतक राष्ट्रीयताका झंडा
विश्वबन्धुत्वकी वेदीपर बलि नहीं दिया जा सकता । देवीदेवता-
ओंने भी इस झंडेकी पूजा की है। शाक्यसिंह भी इस झंडेके नीचे
न लाये जाते तो इसके गौरवमें उतनी ही हीनता रह जाती। परन्तु
हे तथागत ! आप हमारे हैं जैसे श्रीरामचन्द्र या श्रीकृष्णचन्द्र
अथवा श्रीमहावीर हमारे हैं; और आपके शब्द हमारी ही राष्ट्रीय
आत्माकी भावनाओंकी प्रतिध्वनि हैं, आपके दिव्यलोकदर्शन