हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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नहीं हैं। चट्टानोंपर उठे हुए राजमहलोंकी अपेक्षा बुद्धिगत सिद्धा-
न्तोंपर उठा हुआ यह मन्दिर अधिक दीर्घजीवी है। मनुष्यके
अंदर जो स्वाभाविक पाशविक वृत्ति है उससे मनुष्यको स्वतंत्र
करनेका महान् और बहुत कुछ सफल उद्योग उन अर्हतों और
भिक्षुओंने ही सर्वप्रथम किया जो भारतवर्षमें उत्पन्न हुए, जो
भारतवर्षमें ही पले और जो भारतवर्षको ही अपनी धर्मभूमि
समझते थे। इस बातका ख्याल हमें है और इससे हमारे हृदयमें
जो भाव उठते हैं उन्हें हम शब्दों द्वारा नहीं व्यक्त कर सकते।
जब संघके बारेमें हमारे हृदयमें ये भाव हैं तब उस संघके संस्था-
पक भगवान बुद्धदेवके संबन्धमें हम कह ही क्या सकते हैं? हम
क्षुद्रसे क्षुद्र मनुष्य हैं। तथागत! हम अज्ञ हैं, हम कुछ भी
प्लटार्क ऐसी बातोंसे खाली है ? भविष्यपुराणमें सिकंदरशाहके जन्मकी
कथाका अस्वाभाविक वर्णन है। इसलिये क्या यह मानना होगा कि
सिकंदरशाह कोई आदमी ही नहीं हुआ ? यां ये बातें बिलकुल मिथ्या है
कि चन्द्रगुप्तने सेल्युकसकी कन्यासे विवाह किया जैसा कि भविष्यपुराणके
इस श्लोकमें वर्णित है ?—
चन्द्रगुप्तस्तस्य सुतः पौरस्त्याधिपतेः सुताम् ।
सुलवस्य तथोद्वाह्य यावनों बाद्धतत्पर : (?) ॥
सच बात तो यह है कि इन पुराण ग्रन्थोंका हमारे ऊपर बड़ा भारी ऋण
है जो इन्होंने हमारी जातिके पराक्रमोंकी बातें ऐसे ऐसे विप्लवोंसे सुरक्षित
रखी हैं जिन विप्लवोंने अन्य देशोंमें तो समूचे राष्ट्रों और उनकी सभ्यताके
नामतकको मिटा दिया है। हम तो यह कहते हैं कि पाश्चात्य विद्वानोंके
जिन आधुनिक "पुराणों" ने यह आविष्कार किया है कि रामायण ग्रन्थ
तो विजयनगर राज्यकी स्थापनाका ही गीत है अथवा गौतमबुद्धका वर्णन
तो सूर्योदयका ही रूपक है उनकी अपेक्षा हमारे ये प्राचीन पुराण और इति-
हास अधिक सच्चे, अधिक दुरुस्त और अधिक विश्वसनीय हैं।