हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४ हिन्दुत्व
फिरसे स्थापित करनेका प्रयत्न पूर्ण सफल हुआ । अवश्य ही, इन
सिन्धु और सिन्धुस्थान नामका हमारे देश और राष्ट्रपर ऐसा
प्रभाव कि हमारे राष्ट्रका संपूर्ण विचार उस नामसे रंग जाय
और राष्ट्र उसे अपनी चिररक्षित संपत्ति समझे — पूर्ण
रूपसे स्थापित होनेमें कई शताब्दियां लगी होंगी। और आज हम
यह देखते हैं कि “आर्यावर्त” और “भारतवर्ष” इन नामोंका
अर्थ बहुतोंको नहीं मालूम है, पर प्रत्येक मनुष्य — अदनासे
अदना मनुष्य यह जानता है कि हिन्दू हमारा नाम है और हिन्दु-
स्थान हमारा देश है।*
❄ भविष्य पुराणसे जो श्लोक ऊपर दिये गये हैं वे पूर्ण विश्वसनीय
प्रतीत होते हैं; कारण एक तो उनमें परंपरासे सुनी हुई बातका ही उल्लेख
किया गया है; दूसरे हमारे इतिहासकी सामान्य गतिसे भी यही अनुमान
होता है कि उन श्लोकोंमें वर्णित घटनाएं अवश्य हुई होंगी; तीसरे हमें जो
बात यहां दिखलानी है उसके लिये यह कोई बात नहीं है कि उल्लिखित
राजाज्ञाकी तिथि अथवा वह राजाज्ञा निकालनेवाले राजाका नाम न मालूम
हो तो काम न चले; और चौथे, ग्रन्थकार जिस बातका वर्णन कर रहा है वह
अटकल-पच्चू नहीं बता रहा है, उसके विषयमें उसका निश्चय है। विक्रमा-
दित्यकी जो वंशावली उसने ग्रन्थके अन्य भागमें दी है वह यहां दी हुई
वंशावलीसे पूरे तौरपर मिलती है। जो ग्रन्थकार यह वंशावली जानता है वह
उस वंशके प्रमुख राजाओंके चरित्रोंकी मुख्य बातें भी अवश्य जानता
होगा।
और फिर हमारे इतिहासके मुख्य साधन भी तो ये ही परंपरासे सुनी हुई
बातें हैं जो हमारे पुराणोंमें, रामायण और महाभारतमें तथा अन्य प्राचीन
ग्रन्थोंमें ग्रथित हैं। इन बातोंके ब्यौरेपर भले ही कोई संदेह करे, उसकी
तिथियां निश्चित करे या गलत बता दे पर ब्यौरेकी इन त्रुटियोंसे अथवा
आलंकारिक वर्णनोंसे घबराकर हम इन ग्रन्थोंमें वर्णित बातोंको निर्माल्यवत्