हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुस्थान और म्लेच्छस्थान २६
भी जाने कि यह एक जाति है, एक राष्ट्र है, केवल यही नहीं, यह
एक देश है और एक राज्य है। दक्षिण ओर हमारे देशकी स्वाभा-
विक सीमा आप ही बँध चुकी थी। दक्षिण-महासागरसे इस
सीमाकी शोभा और पूर्णता निर्मित थी। "समुद्र-रचना" का
दृश्य देख देखकर हमारे कवि और देशभक्त सदासे ही अपने
नेत्रोंको तृप्त किया करते थे। परन्तु उत्तर-पश्चिम ओर जातियोंका
संमिश्रण बड़े बेढंगे तौरपर हो रहा था तथा हमारे देशकी सीमा
भी सदा अस्थिर रहा करती थी। इसलिये इस ओर सीमा निर्दिष्ट
करनेकी आवश्यकता यदि स्वतः स्थापित होनेके इस उद्योगमें
हमें प्रतीत न होती, तो निश्चय ही यह बड़े आश्चर्यकी बात होती ।
उज्जैनके "महाकाल" के अधिष्ठानमें जिन्होंने स्वराष्ट्र-स्थापनका
इतना महान् उद्योग किया, वे इस सीमाको निर्दिष्ट करनेकी आव-
श्यकताकी उपेक्षा नहीं कर सकते थे । उत्तर-पश्चिमकी यह सीमा
वेगवती, साथ ही गम्भीर स्रोतस्वती सिन्धु नदीके सिवाय और
क्या होती ? जिस दिन हमारे पूर्वज उस नदीको पार करके इधर
आये, उसी दिन उनका सम्बन्ध उन लोगोंसे छूट गया जिन्हें छोड़
कर वे इधर आये और एक नवीन राष्ट्रके संस्थापक हुए—एक
नवीन आशा, नवीन उद्देश्यको धारण कर वे एतद्देशप्रसूत
जातियोंको मिलाते और वंश-विस्तार करते हुए एक जाति और
एक राष्ट्र हो गये। जिस जाति और राष्ट्रको सिन्धु या हिन्दू
कहनेमें जो औचित्य और प्रेम है, वह और किसी नाममें नहीं है।
सिन्धु-नदीको ही अपनी सीमा करना कोई नवीन बात भी