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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 167 में से

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पृष्ठ 43

हिन्दुस्थान और म्लेच्छस्थान २७
यताके लिये अपनी अपनी सेनाएँ भेजी थीं—
श्यामदेशोद्भवा लक्षास्तथा लक्षाश्च जावकाः ।
दशलक्षाश्चीनदेश्या युद्धाय समुपस्थिताः ॥
और कैसा घमासान युद्धके होनेके पश्चात् बौद्ध हारे और
इस हारसे उन्हें कितनी जिल्लत उठानी पड़ी। उन्हें हिन्दुस्थानके
सम्बन्धमें अपने सब गुप्त राजनीतिक हेतु प्रकट रूपसे त्याग
देने पड़े और यह प्रतिज्ञा करनी पड़ी कि अब हम लोग किसी
राजनीतिक हेतुसे भारतमें प्रवेश न करेंगे। पर धर्मसहिष्णुता
जिस भारतकी विशेषता है, उस भारतसे बौद्धोंको व्यक्तिशः कुछ
भी भय नहीं था; पर भारतके राष्ट्रीय जीवन और स्वातंत्र्यपर
चढ़ाई करनेका स्वप्न देखना उन्हें परित्याग करना पड़ा ।
सर्वैश्च बौद्धवृन्दैश्च तत्रैव शपथं कृतम्।
आर्यदेशं न यास्यामः कदाचिद्राष्ट्रहेतवे ॥ (भविष्यपुराण—
प्रतिसर्ग पर्व )
और इस प्रकार हमारे आचार-विचारकी जो विशेषताए
थीं, वे फिरसे प्रकट होने लगीं—वर्णाश्रमव्यवस्था बौद्धोंके
कालमें भी नष्ट नहीं हुई थी और अब तो उसकी लोकप्रियता
इतनी बढ़ गयी कि बड़े-बड़े राजा-महाराजा “वर्णव्यवस्थापनपरः”
(सोनपत-ताम्र लेख)—“वर्णाश्रमव्यवस्थापनप्रवृत्तचक्रः” (मध-
वत ताम्रपट) कहलानेमें अपनी बड़ी प्रतिष्ठा समझते थे।
इस वर्णाश्रम-व्यवस्थाका इतना आदर बढ़ा कि मानों उसीमें
सारी राष्ट्रीयता समा गयी। हमारे और विदेशियोंके बीच जो