हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६ हिन्दुत्व
बौद्ध-मतके विश्वबन्धुत्वके भावका तब तो और भी जोरसे
विरोध होने लगा, जब बौद्ध भारतवर्षमें बौद्ध राज्यकी पुनः
स्थापना करनेकी चेष्टा करने लगे। राष्ट्रीय भावको यह स्वीकार
नहीं था कि राष्ट्रीय स्वाधीनता नष्ट हो और किसी विदेशीय
विजेताको हम अपने राजाधिराज मानें। परंतु यदि यह विदेशीय
आक्रमणकारी कोई बौद्धमतावलंबी हुआ, तब तो यह निश्चय ही
था कि भारतीय बौद्ध उसके साथ गुप्त सहानुभूति रखते, जैसे
कैथोलिक संप्रदायके स्पैनिश उद्योगियोंको इंग्लैण्डकी राजगद्दी-
पर किसी कैथोलिक संप्रदायके वंशको स्थापित करनेके उद्योगमें
इंग्लैण्डके कैथोलिकोंसे अवश्य ही सहायता मिलती थी। यह
केवल निराधार तर्ककी बात नहीं है। प्राचीन ग्रंथोंमें इस बातके
प्रमाण हैं कि कई बार कुछ विदेशी बौद्ध राजाओंने भारतमें बौद्ध
राज्य स्थापित करनेके उद्देश्यसे भारतपर आक्रमण भी किया
था। उस जमानेके इतिहासका विस्तारपूर्वक विवेचन करनेका
यह स्थान नहीं है। पर यहां एक पुराणमें वर्णित ऐसे एक
आक्रमणके वर्णनकी ओर निर्देशमात्र कर सकते हैं। यह वर्णन
कुछ तो अलंकारात्मक और कुछ वास्तविक है। यह “आर्य-
देशजों” पर न्यनपत्ति (हूणोंके राजा) के आक्रमणकी कथा है।
पौराणिक पद्धतिसे बताया गया है कि किस प्रकार “हहा”
नदीके किनारे एक महान् युद्ध हुआ था और किस प्रकार चीनसे
बौद्ध सेना आयी थी (“चीनदेशमुपागम्य युद्धभूमिरकारयत्”)
और किस प्रकार कितने ही अन्य बौद्ध राष्ट्रोंने उसकी सहा-