हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुस्थान और म्लेच्छस्थान २५
सामना करनेका हमारा बल कम होगा। जिस शत्रुके साथ
हमारा किसी भी बातमें मेल नहीं है, उसका हम घोरतम विरोध
कर सकते हैं, जैसे जिस मित्रके साथ हमारा हर बातमें मेल हो
और हम जिसकी प्रत्येक बातको अपने अन्दर पाकर उसकी
कदर करते हैं, उस मित्रके साथ हमारा सबसे अधिक प्रेम होता
है। हिन्दुस्थान विश्वबन्धुत्व और अहिंसाके नशेमें इतना चूर
हो गया था कि पाप, अपराध और आक्रमणका प्रतीकार करने-
की शक्ति भी उसकी नष्ट हो गयी थी, ऐसी अवस्थामें अन्याय-
की तरफसे देशके चित्तमें अत्यंत तीव्र तिरस्कार उत्पन्न करके
उसके प्रतीकारकी अदम्य शक्तिका संचार करनेके लिये यह
आवश्यकता हुई कि जिनके साथ हमें लड़ना है, उनसे हर
बातमें विषमता उत्पन्न की जाय, दोनोंके बीच उपासना-मार्गकी
जो समानता थी, वह भी नष्ट की जाय; क्योंकि इस उपासनामें
अपने उन सहधर्मियोंको गले लगाना पड़ता था, जिन्होंने उक्त
प्रकारसे देशका गला घोंटा था। ऐसे विश्वधर्मको लेकर क्या
करना है, जो राष्ट्रोंकी भयानक तामसी वृत्ति और पाशविक
अहंकारका दमन करनेके बदले हिन्दुस्थानको निश्चिन्त और
बेखबर बनाकर उन राष्ट्रोंकी अधिकार-लालसाको और भी उत्ते-
जित कर देता है? इसलिये उस बल और वीर्यपर ही भरोसा
किया गया, जो राष्ट्रीय आत्मचैतन्यसे ही उत्पन्न हुआ करता है।
इसके पूर्व वह अहिंसाके मार्गपर चलनेके लिये अपना सर्वस्व दे
चुका था, पर उससे उसकी सिद्धि नहीं हुई!