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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 38, कुल 167 में से

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पृष्ठ 38

२२ हिन्दुत्व
—ढाल और तलवार ! यही उनका मंत्र था। इसका फल स्पष्ट
था। यह बात भी स्पष्ट थी कि बौद्धदर्शनमें इस नवीन और
भयानक "द्वैत" का, इस "अग्नि और खड्गके" धर्मशास्त्रका कोई
जवाब नहीं था। इसलिये हमारी जातिके नेताओंको इस अपवित्र
अग्निका सामना करनेके लिये यज्ञीय अग्निको फिरसे प्रज्वलित
करना पड़ा और फौलादके लिये उसे कालीकी वेदीकी सानपर
चढ़ाकर तीक्ष्ण करनेके लिये वेदोंकी खानें खोलनी पड़ीं, जिसमें
कालदेवता 'महाकाल' संतुष्ट हों। उनका विचार भी ठीक
उतरा। हिन्दू क्षात्र तेजने वह विजय प्राप्त की, जो चिरस्मरणीय
रहेगी। विक्रमादित्यने विदेशियोंको भारत-भूमिसे मार भगाया
और ललितादित्यने उनके अड्डोंमें घुसकर तारतरीसे मंगोलिया-
तक उनका देश पादाक्रान्त करके उन्हें अच्छी तरह दण्ड
दिया। वीरताने वह काम किया जो वचनोंकी गंभीरता न
कर सकी। फिर एक बार राष्ट्र उस गौरवको प्राप्त हुआ,
जिसका प्रकाश जीवनके सभी विभागोंपर पड़ा। काव्य
और तत्त्वज्ञान, कला और शिल्प, कृषि और वाणिज्य, विचार
और आचार सबमें वह जीवन-ज्योति आ गयी, जो स्वाधीनता,
सामर्थ्य और विजयकी अनुभूतिसे ही जगमगाया करती है।
पूर्ण क्रांति हुई—कोई कसर नहीं। "वैदिक धर्म" और
"वेदोद्धार" की पुकार मची। राष्ट्रकी यह पुकार बढ़ती ही गयी,
उसका जोर बढ़ता गया, क्योंकि यह राजनीतिक आवश्यकता
ही थी।