हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुस्थान और म्लेच्छस्थान २१
और उनका पतन भी हमारा है। देवानां प्रियं अकोश बड़े थे,
बौद्ध भिक्षुओंने जो काय किया, वह उससे भी महान् था। पर
इनसे यदि अधिक नहीं तो इतने ही महान् और पवित्र तथा इनसे
अधिक विचारपूर्ण पराक्रम इनके पूर्व हो चुके थे और उन्हीं परा-
क्रमोंने इन्हें भी इतना पराक्रमी बनाया था। इसलिये हम इस
बातको नहीं मानते कि हमारी जातिका राजनीतिक ओज और
पुरुषोचित पराक्रम मौर्यवंशके साथ आरम्भ हुआ और उसीके
साथ उसका अन्त हुआ—या यह बौद्ध-मत अंगीकार करनेका ही
परिणाम था। बौद्ध-मतने भी विजय प्राप्त की है, पर वह विजय
उस लोककी है, इस लोककी नहीं, जहाँ जिस-तिसके हाथमें
फौलाद है और तृष्णा इतनी बलवान और वास्तविक है कि
वह आकाश-गंगाके मनोहर दृश्यसे नहीं बुझ सकती।
ये बातें हमारे देशभक्तों और विचारशील पुरुषोंके ध्यानमें आ
गयी होंगी, जब हूण और शक ज्वालामुखीकी अग्निज्वालाओंके
समान इस देशमें फैलकर इसे तहस-नहस करने लगे। हिन्दु-
स्थानवासियोंने देखा कि हमारी जातिके आदर्श—हमारे राज-
सिंहासन, हमारे परिवार और हमारे देवतातक पैरों-तले कुचले
जा रहे हैं, हमारी धर्मभूमि उजड़ रही है और बर्बरोंके झुण्ड
आकर हमें लूट रहे हैं। भारतवासियोंकी सभ्यता और संस्कृतिको
देखते, भाषा, धर्म, तत्वज्ञान तथा दया-दाक्षिण्यादि मनुष्यो-
चित गुणोंमें इन आक्रमणकारियों की अवस्था अत्यन्त हीन थी।
पर केवल भौतिक वलमें वे श्रेष्ठ थे—बल ही उनका सर्वस्व था