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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 36, कुल 167 में से

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पृष्ठ 36

२० हिन्दुत्व
इनके फौलादी खड्गकी धार मृदु तालपल्लवों और सुस्वर
मन्त्रोच्चारसे मन्द होनेवाली नहीं थी। हम उस विशाल विश्व-
बन्धुत्वको और उसके दैवी संकल्पको भुलाना नहीं चाहते—
उसपर अभियोग लगानेकी बात तो दूर रही। पर उसका जो
परिणाम सामने दिखायी देता है, वह इतना प्रत्यक्ष है कि इति-
हासका कोई विद्यार्थी उससे अपना ध्यान नहीं हटा सकता। हम
जानते हैं, हमारे इस कथनके प्रतिवादमें अनायास ही यह कहा
जा सकता है कि भारतवर्षमें जो सबसे बड़े और सबसे
शक्तिशाली राजा और सम्राट् हुए, वे बौद्धकालमें ही हुए। पर
यह कौन कहता है ? यूरोपियन कहते हैं और हमारे वे लोग
कहते हैं, जिन्होंने बे-जाने यूरोपियनोंके विचार और उन विचारों-
के साथ उनके कुसंस्कार भी अपने दिमागमें भर लिये हैं। एक
समय था, जब भारतीय स्कूलों में पढ़ाया जानेवाला भारतका
इतिहास मुसलमानोंके आक्रमणसे ही आरम्भ होता था, क्योंकि
उस समय अंग्रेज लेखक हमारे पूर्वकालीन जीवनकी और कोई
बात प्रायः नहीं जानते थे। अब इधर कुछ कालसे यूरोपको
हमारे बौद्धकालीन इतिहासकी भी बहुतसी-बातें मालूम हुई
हैं और इसलिये हम यह मान बैठते हैं कि हमारे इतिहासका
आदि और सर्वोत्तम अंग यही है। पर बात यह है कि यह इति-
हासका न तो आदि है न अन्त। बुद्ध-धर्म-संघके प्रति हमारा
जितना प्रेम और आदर है, उससे अधिक और किसीका क्या
होगा ? बुद्ध-धर्म और संघ हमारे थे। उनका गौरव हमारा है