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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 33, कुल 167 में से

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हिन्दुस्थान और म्लेच्छस्थान १७
न विदेशोंसे इतना घनिष्ठ सम्बन्ध ही हुआ था। यही नहीं,
बल्कि बाहर देशवाले भी आ-आकर पहलेसे अधिक उद्दण्डता
और प्रभुताके साथ हमारा द्वार खटखटाने लगे। इस राजनीतिक
परिवर्तनके साथ-साथ बौद्ध-धर्मने भी भारतवर्षको उस समयके
ज्ञात संसारका हृदयस्थान बना दिया। मिश्रसे लेकर मेक्सिको-
तक असंख्य जनसमुदाय सिन्धुस्थानको अपने देवताओं और
देवतुल्य मनुष्योंका वासस्थान मानने लगा। भिन्न-भिन्न देशों-
से सहस्रों यात्री यहाँ आने लगे और सहस्रों विद्वान, उपदेशक,
साधु और सन्त इस देशसे बाहर जाकर नाना देशोंमें विचरण
करने लगे। परन्तु बाहर-देशवाले हमें हमारे “सिन्धु” या “हिन्दू”
इस प्राचीन नामसे ही जानते और पुकारते थे, इसलिये लोगोंका
: यह आना-जाना हमारे राष्ट्रीय नामोंमेंसे इसी नामको सर्व-
प्रधान बनानेमें ही सहायक हुआ। उन भिन्न-भिन्न राज्योंके
: साथ, जो हमें हिन्दू नामसे जानते थे, जो राजनीतिक पत्रव्यव-
हार होता था, उसमें पहले “भरतखण्ड” के साथसाथ “हिन्दु-
स्थान” और पीछे अकेले “हिन्दुस्थान” शब्दका ही प्रयोग होने
लग गया होगा।
बौद्ध-धर्मके उदयसे संसारमें इस नामका इतना प्रचार हो
गया, पर आश्चर्यकी बात यह है कि उस बौद्ध-धर्मके अस्तसे
इस नामका और भी अधिक प्राधान्य हो गया ।
बौद्ध-मतका पतन होनेका जो सबसे प्रधान कारण है, हम
समझते हैं, उसकी ओर विद्वानोंका उतना ध्यान नहीं गया है
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