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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 30, कुल 167 में से

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पृष्ठ 30

१४ हिन्दुत्व
प्रधान पुरुष था, और भरतवंशके साथ उसका अति निकट
सम्बन्ध था। सिन्धुराष्ट्रकी चतुःसीमा समय-समयपर बदलती
रही है तो भी मुलतानसे लेकर समुद्रतक जो भाषा वहाँके
लोग बोलते थे और अब भी बोलते हैं उससे वे स्वयं एक
जाति मालूम होते हैं और उनका 'सिन्धी' नाम अबतक यह
स्मरण दिलाता है कि जो लोग यह भाषा बोलते हैं, वे सिन्धु
हैं और हमारे भारतीय राष्ट्रके अन्दर उनका एक विशिष्ट
स्थान है। यद्यपि भरतखंड नामने हमारे राष्ट्रका पालनेका नाम
दबा दिया तथापि विदेशीय राष्ट्रोंने इसकी उपेक्षा ही की और
हमारे सीमा-प्रान्त प्राचीन नामोंसे ही जाने जाते थे; और
हमारे नजदीकी पड़ोसी अवेस्तानुयायी ईरानी, यहूदी, यूनानी
तथा अन्य लोग हमें हमारे प्राचीन सिन्धु या हिन्दु नामसे
ही जानते थे। वे इस नामका उपयोग केवल सिन्धु-नदीके तट
प्रदेशको जनानेके लिये ही नहीं करते थे, बल्कि समस्त देशको
इसी नामसे जनाते थे, जिसमें प्राचीन सिन्धु अन्य जातियोंके
साथ मिलते-मिलाते फैल गये थे। अवेस्तानुयायी ईरानी हमें
हिन्दू जानते और यूनानी कर्कश हकारको त्याग 'इंडो' और
यूरोपियनोंके द्वारा लगभग सारा यूरोप और पीछेसे अमेरिका भी
हमें हिन्दू या इंडियन कहने लगा। जो हुएन संग हमारे साथ
इतने कालतक रहा वह भी हमें "शिन्तु" या "हिन्तु" ही कहता
है। कुछ थोड़े उदाहरणोंको छोड़कर जैसे पारथियन लोग
अफगानिस्तानको श्वेत भारत कहते थे, अन्यथा शायद ही कभी