हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दू नामकी उत्पत्ति ६
और बहुतोंने इस नये देशके नये दृश्य आर्योंको दिखानेमें पथ-
प्रदर्शकका काम किया, क्योंकि आर्य इस देशमें नये थे। विद्याधर,
अप्सरा, यक्ष, रक्ष, गन्धर्व, किन्नर आदि सभी आर्यों के पूर्णतया
शत्रु थे यह बात नहीं, क्योंकि अनेक स्थानोंमें इनके सुखभा-
वादिका वर्णन है। इस प्रकार यह बहुत सम्भव है कि इस देशके
आदिम निवासियोने यहाँकी महानदियोंके जो नाम इन्हें बताये,
उन्हीं नामोंको संस्कृत रूप देकर इन्होंने स्वीकार कर लिया।
जाति और भाषाको मिला लेनेकी इस प्रवृत्तिका विस्तार हमें
आगे बहुत दिखाई देता है—शलकंटकटा, मलय, मिलिंद, अलसंदा
( अलेकजण्ड्रिया ), सुलूम ( सेल्यूकस ) आदि शब्दोंको देखिये।
यदि यह सच हो कि इस प्रकार अन्य भाषाओंके शब्दोंको संस्कृत
रूप देकर अपनी भाषामें मिला लेनेकी प्रवृत्ति पहलेसे चली
आती है, तो यह बहुत सम्भव है कि हमारे देशके आदिम निवासी
“सिन्धु” नदीको “हि'दू” ही कहते हों और आर्यों की विशिष्ट
उच्चारण-पद्धतिके कारण यह नाम “हि'दू” से “सिंधु” हो गया।
इस प्रकार इस देश और इस देशमें रहनेवाली जातिका नाम
अत्यंत प्राचीनकालसे “हिंदू” ही है—यहांतक कि “सिंधु” जो
वैदिक नाम हैं, वह भी उसका उसके पीछेका रूप है। यदि “सिन्धु”
शब्द इतना प्राचीन है कि इतिहासकालके अरुणोदयमें उसका मूल
मिलता है तो “हि'दू” शब्द उससे भी इतना अधिक प्राचीन है
कि प्राचीन गाथाएं भी उसके मूलका पता लगानेमें असमर्थ हैं।
सिन्धुओं या हिन्दुओं जैसे पराक्रमी लोग पंचनद या पञ्जाब-