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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 167 में से

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पृष्ठ 24

८ हिन्दुत्व
क्षेत्रकी थोड़ी सैर करेंगे । आर्योंका आदि वासस्थान कौन था-
इस विषयमें अभी हमने कोई सिद्धान्त नहीं माना है। परन्तु
हिन्दुस्थानमें उनके प्रवेशके संबंधमें जो सिद्धांत बहुतोंने मान
लिया है, उसे हम स्वीकार कर लें तो स्वभावतः यह जिज्ञासा होती
है कि उन्होंने इस देशको अपनी मातृभूमि मानकर उसके दृश्योंके
जो नाम रखे, उनकी उत्पत्ति कहाँसे हुई । क्या ये सब नाम
उन्होंने अपनी भाषासे ही नयी शब्दसृष्टि करके रखे ? जब हम
कोई नया दृश्य देखते या किसी नवीन देशमें प्रवेश करते हैं, तब
क्या यह बात सच नहीं है कि हम उस दृश्य या देशका वही
नाम लेते हैं, जो नाम वहांके लोग लेते हों ? नामके उच्चारणमें
अपनी-अपनी उच्चारण-क्षमता या रुचिके अनुसार थोड़ा भेद हो
सकता है, पर नाम तो वही रहता है जो वहाँके अधिवासियों-
द्वारा लिया जाता है। हां, कभी-कभी ऐसा भी होता है कि
अपने यहाँके पुराने प्रिय नामोंका उपयोग नये देशकी नयी
वस्तुओंके लिये किया जाता है, खासकर जब नये उपनिवेश
कायम किये जाते हैं। परन्तु यह तभी होता है जब पुराने देशमें
वे नाम व्यवहृत होते हों जो नये देशकी नयी वस्तुओंको दिये
गये। परन्तु इस अवस्थामें भी जिन वस्तुओंके जहाँ जो नाम
हैं, उन्हींका उपयोग करनेकी रीति अधिक प्रचलित है। अब
सप्तसिंधुके प्रदेशका विचार कीजिये । हम सब यह निश्चितरूपसे
जानते हैं कि इस प्रदेशमें अनेक जातियाँ अलग-अलग रहती
थीं । इनमेंसे कुछने नवागन्तुकोंके साथ अच्छा व्यवहार किया