सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 22, कुल 167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 22

६ हिन्दुत्व
हमारे पास इस बातके पक्के प्रमाण हैं कि आसपासके राष्ट्र इन्हें
“सप्तसिन्धु” के नामसे ही जानते थे । संस्कृतका “स” भारतीय
तथा भारतीयेतर प्राकृतोंमें आकर प्रायः “ह” हो जाता है ।
उदाहरणार्थ, सप्त शब्द भारतीय प्राकृतोंमें ही हप्त नहीं हो गया
है प्रत्युत यूरोपियन भाषाओंमें भी वह हप्त हो गया है; “सप्ताह”
को हिन्दुस्थानमें “हफ्ता” और यूरोपमें “हेप्तार्की” कहते हैं ।
संस्कृतका “केसरी” शब्द पुरानी हिन्दीमें “केहरी” हो गया
है । “सरस्वती” शब्द ईरानी भाषामें “हरहवती” हो गया है और
“असुर” का रूपान्तर हुआ है “अहुर” । और तो और, हमारे
राष्ट्रका वैदिक नाम “सप्तसिन्धु” प्राचीन ईरानियोंके “अवेस्ता”
में “हप्तहिन्दु” करके लिखा गया है । इस प्रकार इतिहासके उषः-
कालमें ही हम देखते हैं कि हम “सिन्धु” याने “हिन्दू” राष्ट्रके
थे और यह बात पौराणिक युगमें भी हमारे पण्डितवर्गको
अच्छी तरह मालूम थी । भविष्य-पुराणमें जहाँ म्लेच्छ-भाषाओंको
संस्कृतकी ही शाखाएं कहा गया है, वहां यह बात स्पष्ट रूपसे
कही गयी है और आगे लिखा है—
संस्कृतस्यैव वाणी तु भारतं वर्षमुह्यताम् ।
अन्यखण्डे गता सैव म्लेच्छाद्यानंदिनोऽभवन् ।
पितृ पैतर भ्राताच बादरः पतिरेवच ।
सेति सा यावनी भाषा ह्यश्वश्चास्यस्तथा पुनः ।
जानुस्थाने जैनु शब्दः सप्तसिन्धुस्तथैव च ।
हप्तहिन्दुर्यावनीच पुनज्ञेया गुरुंडिका॥ (प्रतिसर्ग पर्व अ०५)