हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दू नामकी उत्पत्ति ५
और इन स्थायी नदियोंसे सदा ही जीवनी शक्ति प्राप्त करते हुए,
इन लोगोंने कृतज्ञताबुद्धिसे अपना नाम भी सप्तसिन्धु रख लिया,
जो सप्तसिन्धु नाम संसारके सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेदमें आता
है और जो समूचे वैदिक भारतवर्षका नाम था। आर्य लोग
कृषिको सदासे ही प्रधान वृत्ति मानते आये हैं। ( सर्वोत्तमंकर्ष-
णमाहुरायार्याः ), और आर्य कृषक ही थे, इससे स्वभावतः
ही इन सात नदियोंके परम भक्त थे और सिन्धुप्रधान ये सातों
नदियाँ उनके लिये उनकी राष्ट्रीयता और संस्कृतिके चिह्नस्वरूप
ही थीं—"इमा आपः शिवतमा इमा राष्ट्रस्य भेषजीः। इमा राष्ट्र-
स्य वर्धनीरिमा राष्ट्र भृतोपमाः॥"
यहांसे आर्य जब और आगे बढ़े तब उन्हें ऐसी ही परमोप-
कारिणी नदियाँ अनेक मिलीं, परंतु सप्तसिन्धुओंपर उनकी श्रद्धा
और भक्ति कम नहीं हुई। और कम होती भी कैसे,जब इन्हीं सप्त-
सिन्धुओंने उन्हें एक राष्ट्र बनाया था और उन्हें वह नाम दिया
था, जिसके द्वारा वे अपनी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकताको
प्रकट करते थे। आजभी प्रत्येक हिन्दू, चाहे वह कहींका हो,
कृतज्ञताके साथ सप्तसिन्धुओंका स्मरण करता और आत्मशुद्धि-
के लिये उनका आवाहन करता है। “इमं मे गंगे यमुने सरस्वति
शुतुद्रिस्तोमं सचना परुष्णया। असिक्न्या मरुद्वृधे वितस्तयार्जी-
कीये शृणुह्या सुषोमया ॥ गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु॥"
ये लोग अपने आपको "सिन्धु” कहते थे, यही नहीं, बल्कि