हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
पृष्ठ 163, कुल 167 में से
संदर्भ में पढ़ेंदेश, जाति, संस्कृति और संख्या, इन सब बातोंमें प्रायः हमारा
समभाग्य है परंतु राष्ट्रीयत्वकी दो बातोंमें चीनी भी हमसे घट-
कर हैं। वे दो बातें हैं-पूर्ण विकासको प्राप्त संस्कृत भाषा
और यह पावन जन्म-भूमि ।
इस प्रकार हिन्दुत्वके आधारभूत जो लक्षण हैं वे राष्ट्रीयताके
भी आधारभूत तत्व हैं। यदि हम चाहें तो हिन्दुत्वकी इस
आधारभूमिपर अपना वह भविष्य निर्माण कर सकते हैं जिसे
आजतक संसारके अन्य किसी राष्ट्रने स्वप्नमें भी न देखा हो--
वह भविष्य जो हमारे प्राचीन गौरवसे भी अधिक महान् हो ।
शर्त यह है कि हम इन बातोंका उपयोग करनेमें समर्थ हों । लोग
यह स्मरण रखें कि यह समय संघका है--चारों ओर बड़े बड़े
संघ बन रहे हैं। राष्ट्रोंका संघ, मित्रराष्ट्रोंका संघ, अखिल-
इस्लाम-संघ, स्लाव जातियोंका संघ, ये सब क्या हैं ? यह सब
छोटे छोटे जीवोंका संघटनद्वारा बड़े होनेका उद्योग है जिसमें
इस जीवनसंग्राममें विजयी होकर रहनेकी शक्ति प्राप्त हो । जो
लोग संख्या-बलमें कम हैं, जिनकी देशिक स्थिति दुर्बल है, जो
प्राकृतिक और ऐतिहासिक बलसे संपन्न नहीं हैं, वे औरोंके साथ
मिलकर प्रबल होना चाहते हैं। धिक्कार है उनको जिन्हें जन्मतः
ये सब बल प्राप्त हैं पर जिन्हें उनका पता नहीं या पता होकर
भी जो उनका तिरस्कार करते हैं ! संसारका प्रत्येक राष्ट्र किसी
न किसी संघमें स्थान प्राप्त करनेके लिये बेचैन होकर चेष्टा कर
रहा है । परन्तु हिन्दुओ ! आप चाहे जैन हों, समाजी]