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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

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हिन्दू-जातिकी शक्ति १४५
मुसलमान तो यह साफ साफ कह भी देते हैं कि यदि इस्लामके
गौरवके लिये या मक्केकी रक्षाके लिये आवश्यक हो तो हिन्दु-
स्थानकी सब बातोंका बलिदान कर सकते हैं। यहूदियोंको
देखिये। जिन देशोंमें ये लोग रहे, जहां इन्होंने पनाह पायी, जहां
रहे और फले-फूले उन देशोंसे इनका अपनी पुण्यभूमिसे अधिक
क्या, उतना भी प्रेम नहीं हुआ। इनका प्रेम सदा ही अपनी पुण्य-
भूमि और मातृ-भूमि इन दोनोंमें बँटा हुआ ही रहेगा। यदि यहूदि-
योंका स्वप्न कभी सत्य हुआ—फिलस्तीन यदि कभी यहूदी राष्ट्र
बना तो ये अपनी पुण्यभूमिका स्वार्थ पहले देखेंगे और पीछे
अपनी अमेरिका और यूरोपकी मातृभूमिका; और यदि इस यहूदी
राज्य और इनकी मातृभूमिके बीच युद्ध छिड़ा तो इनकी सहानु-
भूति यहूदी राज्यकी तरफ ही होगी, चाहे तनसे वे उस तरफ जा-
कर न मिलें। इतिहासमें इस प्रकारके उदाहरण भरे पड़े हैं।
यूरोपमें क्रूसेडकी जो लड़ाइयाँ हुईं उनमें भिन्न-भिन्न जातियों,
राष्ट्रों और भाषाओंके लोग एक होकर अपनी पुण्यभूके लिये लड़े।
इससे भी पुण्यभूका प्रभाव कितना बलवान होता है यह स्पष्ट
मालूम हो जाता है।
इसलिये किसी राष्ट्रके पूर्ण संघटित और अखंड होनेके लिये
जो सबसे उत्तम अवस्था हो सकती है वह यही है कि मातृभू
और पुण्यभू एक ही हो—वही पूर्वपुरुषोंकी भूमि हो, वही देव-
ताओं और आचार्योंकी भूमि हो; वही अपने इतिहासकी घटना-
ओंकी भूमि हो, वही ईश्वरी लीलाके दृश्योंकी भूमि हो।
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