हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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इतनी मजबूत नींव बन सकते हैं कि इस नींवपर हिन्दू-जाति
अपना वह भविष्य-निर्माण कर सकेगी जिससे उसपर होनेवाले
आक्रमणोंका निवारण हो जाय, या हिन्दू-जातिने यह बालूकी
भीत खड़ी की है ?
कुछ प्राचीन राष्ट्रोंने अपने समग्र देशको ही दुर्गकी तरह
सुरक्षित करनेके लिये बड़ी बड़ी दीवारें खड़ी कीं। आज वे
दीवारें टूट-फूट गयी हैं और यत्र-तत्र दिखायी देनेवाले उनके
अवशिष्ट चिह्नोंसे ही उनकी पहचान होती है; और जिन जातियों-
की रक्षाके लिये ये दीवारें खड़ी की गयीं उनका तो कहीं पता
ही नहीं है ! हमारे पुराने पड़ोसी चीनियोंने पीढ़ी-दर-पीढ़ी
परिश्रम करके अपने विशाल साम्राज्यके एक छोरसे दूसरे छोर-
तक एक इतनी बड़ी, इतनी ऊंची और इतनी मजबूत दीवार
खड़ी की कि संसार उसे मानवी प्रयत्नका एक आश्चर्य समझता
है। यह आश्चर्य भी, अपने ही बोझके नीचे दब गया। सभी
मानवी आश्चर्योंकी अन्तमें यही गति होती है ! परन्तु प्राकृतिक
आश्चर्योंको देखो ! जिसकी सब इच्छाएं परितृप्त हो चुकी हों
ऐसे अचल स्थितप्रज्ञ साधुकी तरह यह हिमालय ज्योंका त्यों
खड़ा है। वैदिक कालमें ऋषियोंने इसका जो रूप देखा वही
आज हम भी देख रहे हैं। यह हिमालय ही हमारा कोट (प्राचीर)
है, जिसने इस विशाल देशको एक अभेद्य गढ़ बना दिया है।
आप खाई खनकर गगरियोंसे उनमें पानी भरते हैं और
उसे परिखा कहते हैं। पर देखिये, यहां प्रत्यक्ष वरुण-देव ही