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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 152, कुल 167 में से

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पृष्ठ 152

१३६ हिन्दुत्व
कह सकता कि, "देखो मैं कैसे खिलता हूँ, हंसता हूँ और
सुगन्ध देता हूँ, और यह सब इस डंठेसे निकलनेकी बदौलत !
पौधेकी जड़से तो मैं नहीं निकला—उससे मेरा क्या संबंध ?"
जब आप किसी सिखकी ओर संकेत करके कहते हैं कि यह
गुरुका सच्चा अनुयायी था तब आप बिना कहे ही यह कहते हैं
कि यह हिन्दू अपने गुरुका सच्चा अनुयायी निकला, क्योंकि सिख
होनेके पहले वह हिन्दू था और सिख होनेके बाद भी वह हिन्दू ही
रहता है। जबतक सिख अपने सिख-धर्मको सच्चाईके साथ मानते
रहेंगे तबतक वे हिन्दू ही बने रहेंगे; क्योंकि तबतक यह भारत-
भूमि (आसिन्धु सिन्धु-पर्यन्ता) उनकी पितृभू और पुण्यभू
रहेगी। जब वे सिख-धर्मसे ही च्युत हो जायेंगे तभी वे शायद
हिन्दुत्वसे भी च्युत हो सकते हैं।
सिख लोगोंके संबंधमें हमने किसी कदर विस्तारके साथ ही
यहां तक विचार किया। कारण, इस विचारमें जो जो बातें और
दलीलें अपनी परिभाषाको सिखोंके हिन्दुत्वपर घटानेमें पेश की
गयीं वे सब ऐसे ही अन्य सभी अवैदिक पन्थों और संप्रदायोंपर
घटनेवाली हैं। उदाहरणार्थ, देवसमाजी निरीश्वरवादी हैं। परन्तु
निरीश्वरवाद या नास्तिकवादसे हिन्दुत्वका क्या लेना-देना है ?
देवसमाजी इस भूमिको अपने पूर्वपुरुषोंकी भूमि—पितृभू मानते
हैं। उसी प्रकार पुण्यभू भी मानते हैं। इसलिये वे हिन्दू हैं। अब
इतना सब कह चुकनेके बाद यह कहनेकी आवश्यकता ही नहीं
रहती कि आर्यसमाजी भाई भी हिन्दू ही हैं। कारण, हिन्दुत्वके