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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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परिभाषाकी जांच १३५
सहायता करते करते अपने प्राण अपर्ण किये थे इत्यादि उदाहरण
देकर उन्होंने इसका मुंह बन्द किया। शिवाजी महाराजके साथ
उनके अपने लोगोंने और उनके पोते शाहू महाराजके साथ पिसाल
जो हिन्दू था उसने दगा की। पर इससे क्या शिवाजीने अपनी
जातिको छोड़ दिया या हिन्दुत्वसे नाता तोड़ा ? वीर बंदाके साथ
कितने ही सिखोंने विश्वासघात किया। उसी तरह अंगरेजोंके साथ
खालसाका जो अन्तिम युद्ध हुआ उसमें भी अनेक सिखोंने अपने
पन्थके साथ दगा की। स्वयं गुरु गोविन्दसिंहको उस घमासान
युद्धमें अकेला छोड़कर अनेक सिख भाग गये और उसीसे उस
नराधम “ब्राह्मण” को गुरुके बेटोंके साथ विश्वासघात करनेका
मौका मिला। परन्तु इस ब्राह्मणके पापके कारण हम लोग हिन्दू-
त्वसे ही नाता तोड़ें तो उन विश्वासघातक सिखोंके कारण सिख-
पन्थसे भी नाता तोड़ना पड़ेगा।
हिन्दू-जातिके अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक समाज कुछ
आकाशमें नहीं टपक पड़े हैं। ये सब समाज एक ही ऐसे वृक्षके
फल हैं जिसकी जड़ें एक ही संस्कृति और एक ही भूमिमें बहुत
दूरतक चली गयी हैं। किसी मेमनेको पकड़कर उसे कच्छ
और कृपाण धारण कराके आप उसे सिंह नहीं बना सकते ! गुरु
गोविन्दसिंह जो शहीदों और योद्धाओंकी एक सेना खड़ी कर
सके उसका कारण यही है कि उनके वीर खालसाको जिस
जातिने उत्पन्न किया उसमें यह सामर्थ्य थी। सिंहके बीजसे ही
सिंह पैदा होते हैं। पौधेकी डारपर खिला हुआ फूल यह नहीं