हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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ऐसा मिला हुआ है कि उसे उससे अलग नहीं कर सकते।
अतीतकालकी तरह भविष्यकालमें भी जहां कहीं विदेशियोंका
हिन्दू सभ्यतापर आक्रमण होगा, वहांपर वह आपके लिये भी
उतना ही प्राणान्तक होगा जितना अन्य किसी भी हिन्दू-समाज-
के लिये। अतीतकालकी तरह भविष्यकालमें भी जब कभी यह
समग्र हिन्दू-जाति किसी शिवाजी या रणजीतके नायकत्वमें,
रामचन्द्र या युधिष्ठिरके नायकत्वमें, अथवा किसी अशोक या
अमोघवर्षके नायकत्वमें पूर्ण चैतन्य लाभ कर,विक्रम और गौरव-
के शिखरपर आरोहण करेगी तब उसकी प्रभा आपपर भी उतनी
ही पड़ेगी जितनी हिन्दू-जातिके अन्य किसी भी समाजपर।
इसलिये, प्यारे भाइयो, छोटी छोटी बातोंके लोभमें पड़कर या
इतिहासका विपरीत अर्थ ग्रहण कर हतबुद्धि मत हो। एक बार
एक ग्रन्थीसे मेरी भेंट हुई। था तो ग्रन्थी, पर एक ब्राह्मणके
घरपर डाका डालनेके अपराधमें इसे सजा हुई थी। उस
ब्राह्मणका यह कर्जदार था और इसने उसका खून किया था।
इस ग्रन्थीने मुझसे कहा कि सिख हिन्दू नहीं हैं और किसी
ब्राह्मणको मारनेमें कोई पाप नहीं है; क्योंकि गुरु गोविन्दसिंहके
बेटोंके साथ एक ब्राह्मण रसोइयेने दगा की थी। सौभाग्यवश
वहां एक और सिख महाशय थे। ये भी ग्रन्थी थे और यथार्थमें
ग्रन्थी थे। बड़े बड़े सिख विद्वान इन्हें मानते थे। इन्होंने उस
ग्रन्थीकी बातका खंडन किया। मतिदास आदि ब्राह्मणोंने गुरु
गोविन्दसिंहको आश्रय दिया था और अनेक ब्राह्मणोंने सिखोंकी