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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 15, कुल 167 में से

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पृष्ठ 15

संघटित हिन्दू-शक्तिका पराभव नहीं कर सकी। जब और जहां
हिन्दू विघटित हुए तब और वहां ही विदेशियोंको अवसर मिला
और इसी तरहसे हिन्दुस्थान पराधीन हुआ। सिन्धपर मुसलमा-
नोंका जो सबसे पहले आक्रमण हुआ और जिसने भारतवर्षमें
विदेशी राज्यकी नींव डाली वह आक्रमण भी कभी सफल न
होता, कभी विदेशी राज्यकी वह नींव न पड़ती यदि सिन्धके हिन्दू
एक होते और वहांके बौद्ध और सनातनधर्मावलम्बी आपसमें ही
न झगड़ते। परन्तु यह इतिहास है जो बदल नहीं सकता। हां,
इससे जो शिक्षा मिलती है वह यही है कि हिन्दू धैर्य, शौर्य और
जीवनीशक्तिमें संसारकी किसी भी जातिसे हीन नहीं, बल्कि सब
जातियोंसे श्रेष्ठ ही प्रमाणित हुए हैं और यदि यही जाति संघटित
हो तो फिरसे यह संसारकी सिरमौर बने। हिन्दू-जातिका पिछला
सहस्रों वर्षका इतिहास संसारकी किसी भी जातिसे अधिक
उज्ज्वल है और इसलिये इसका भावी इतिहास भी संसारमें सबसे
अधिक उज्ज्वल होनेवाला है।
हिन्दुत्वकी रक्षाके लिये हिन्दू-संगठन आवश्यक है। हिन्दुत्व-
की रक्षा और हिन्दुस्थानके सर्वजनसमाज-सुखदायी स्वराज्यके
लिये ही हिन्दू संगठन हो रहा है। हिन्दू-जातिको जो आत्मवि-
स्मृति हुई है उसे नष्ट करके उसे आत्मस्मरण करा देना है।
इसलिये हिन्दुत्व क्या है, यही सबसे पहले जानना और जनाना
होगा जिसमें एक हिन्दू दूसरे हिन्दूको देखते ही हिन्दुत्वके
प्राणसे समप्राण हो जाय और अहिन्दू भी अपने हिन्दू रूपको