हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुओंके “हिन्दुत्व” की रक्षाका यह पिछला इतिहास हिन्दुओं-
के खड्गका इतिहास है, पर यह खड्ग निरपराधियोंके रक्तसे रंगा हुआ
नहीं है। उसने मनुष्यत्वकी हत्या नहीं की है, सांप्रदायिक अहं-
कारके शैतानकी उपासना नहीं की है। यह वही हिन्दू-जाति है
जिसने ही पहलेपहल संसारमें अहिंसा-धर्मका प्रचार किया, जिसने
ही संसारको खड्गसे नहीं, अमरत्वके सनातन शांतिप्रद उपदेशसे
अपना शिष्य और अंकित बनाया, जिसने अहिंसा धर्मका यहां-
तक प्रचार किया कि पशु-पक्षोको मारना भी दंडनीय अपराध
माना, जिसके शांतिप्रद श्रेष्ठ जीवनको देखकर विदेशियोने ही
इसे “इंदु” की उपमा दी और आज भी आधेसे अधिक जगत
जिसकी जन्मभूमिको अपनी पुण्यभूमि मानता है। इस हिन्दू-
जातिकी विजय संसारमें सत्यकी विजय है। हिन्दू-जातिका
यही मिशन है। इसीके लिये उसे अपने “हिन्दुत्व”-रक्षाका व्रत
अखंड रखना है। अब वह परिस्थिति नहीं है जो पहले थी; पर
संग्राम अब भी है। अब उसका रूप दूसरा है—प्राण वही है।
इस इतिहाससे हमें हिन्दू-जातिके अनन्त धैर्य, अनुपम शौर्य और
अद्भुत जीवनी शक्तिका परिचय मिलता है; पर इस धैर्य, शौर्य और
जीवनी शक्तिके साथ एक बात यदि और होती तो हिन्दुस्थानके
इतिहासमें यह थोड़ासा काल जो पराभव और परदास्यमें बीता,
यह भी इस तरह न बीतता। जिस बातकी कसर आज स्पष्ट
दिखायी देती है वह बात है संघटन। यह एक ऐतिहासिक सत्य
है कि हिन्दुस्थानमें आकर कोई भी विदेशी सेना कभी किसी