हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिभाषाकी जांच १३१
उसके अयथार्थ प्रयोगकी इस गड़बड़ीसे यह आत्मघात करनेवाली
प्रवृत्ति उत्पन्न हुई जो समय समयपर भाई भाईमें बैर कराती
है। हम यह स्पष्ट रूपसे दिखला चुके हैं कि हिन्दुत्वकी कसौटी
कोई धार्मिक कल्पना नहीं है। यहां हम फिर वही बात कहते
हैं कि सिख यदि चाहें तो "सनातनधर्म" की उन सब बातोंको,
यहां तक कि वेदोंके अपौरुषेयत्वको भी अन्धविश्वास कहकर
अस्वीकार कर सकते हैं। ऐसा करनेसे वे सनातनी नहीं रहेंगे,
पर तौभी हिन्दुत्वपर उनका पूरा अधिकार रहेगा। हिन्दुत्वकी
हमारी जो परिभाषा है उसी परिभाषाके अनुसार सिख हिन्दू हैं,
किसी धार्मिक कल्पनाके अनुसार नहीं। सम्प्रदायतः वे सिख
हैं, जैसे जैन जैन हैं, लिंगायत लिंगायत हैं या वैष्णव वैष्णव हैं।
पर जाति, राष्ट्र और संस्कृतिके नाते ये सब एक अखण्ड जाति
और राष्ट्र हैं और सनातनसे ही ये सब हिन्दू कहलाते चले आते
हैं। यही हिन्दू नाम ही इनके लिये यथार्थ है। और कोई दूसरा
नाम हमारी जातीय एकताको अभिव्यक्त नहीं कर सकता। भार-
तीय शब्दसे भी वह संपूर्ण भाव नहीं प्रकट होता, यह हम पिछले
परिच्छेदोंमें दिखला ही चुके हैं। भारतीय शब्द इससे अधिक
व्यापक है, उससे भारत या हिन्दुस्थानमें रहनेवाले व्यक्तिमात्रका
बोध होता है—हम सब हिन्दुओंकी जातीय एकताका नहीं। हम
सिख हैं, हिन्दू हैं और भारतीय हैं। हम एक साथ तीनों हैं,
अलग अलग कुछ भी नहीं।
हमारे कुछ सिख भाई जो अपनेको हिन्दुओंसे पृथक् गिनाने