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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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परिभाषाकी जांच १२६
होकर, अयोध्याके राजमहलों और लंकाकी समर-भूमिसे होता हुआ
लहुसे लाहोरकी नींव पड़ती देखता और कपिलवस्तुसे प्रस्थान
करते सिद्धार्थके दर्शन करता, त्रितापदग्ध मनुष्यकी मुक्तिका
उपाय ढूंढनेके लिये गुफाओंमें जा छिपता है। हमारे साथ सिख
भी पृथ्वीराजकी हारपर अश्रुपात करते हैं और हिन्दूके नाते
हिन्दुओंके दुर्भाग्य और दुःखोंका अनुभव करते हैं। उदासी,
निर्मले, गहनगंभीर और सिन्धी सिख संस्कृत भाषाको केवल
अपने पूर्वजोंकी भाषा ही नहीं मानते प्रत्युत उसे अपने देशकी
पवित्र भाषा-देववाणी मानते हैं। अन्य सिखोंको भी इसे अपने
पूर्वजोंकी भाषा और उन गुरुमुखी और पञ्जाबीकी जननी मान-
कर पूजना ही पड़ता है जो गुरुमुखी और पञ्जाबी अभी अपनी
बाल्यावस्थामें हैं और जो जननीके स्तनोंसे ही अपने जीवनका
पोषक रस पान करती हैं। अन्तिम बात यह है कि यह “आसिंधु
सिंधु-पर्यंता” भूमि न केवल उनकी पितृभू है, बल्कि पुण्यभू भी
है। गुरु नानक और गुरु गोविन्द, श्री बंदा और रामसिंह हिन्दु-
स्थानमें ही पैदा हुए और पवित्र हिन्दुस्थानके ही सरोवर अमृतसर
और मुक्तसर हैं, हिन्दुस्थानकी ही भूमि गुरुद्वार और गुरु-
गृह है। सचमुच ही यदि किसी जातिके हिन्दू होनेमें कुछ भी
कोर-कसर नहीं है तो वह सिख-जाति ही है। कारण, ये सिख
सप्तसिन्धुके तटपर रहनेवाले आदि निवासी हैं और “सिन्धु”
अथवा “हिन्दु” के प्रत्यक्ष वंशज हैं। आज जो सिख है वह कल
हिन्दू था और आजका हिन्दू कलका सिख हो सकता है। शेषमें,