हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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किसी हिन्दूमें। महाराष्ट्र और बंगालके हिन्दुओंमें आर्योंके
रक्तके साथ वहां बसनेवाली जातियोंका भी रक्त मिला हुआ
है। परन्तु सिख तो अभिमानके साथ यह दावा कर सकते हैं
कि हम तो उन्हीं प्राचीन सिन्धुओंके ही प्रत्यक्ष वंशज हैं, और
हिन्दू-जीवनकी यह गंगा नीचे आकर बहने लगनेके पूर्व ही उस
गंगाके उद्गम स्थानमें हमारा जन्म हुआ है। तीसरी बात, हिन्दू-
संस्कृतिकी संपत्ति बढ़ानेमें उनका भी हाथ है और इसलिये हिन्दू-
संस्कृतिके हमारी तरह वे भी अधिकारी हैं। कारण सरस्वती
विद्या और कलाकी अधिष्ठात्री देवी मानी जानेके पूर्व पञ्जाबमें
एक नदी थी। आज भी हिन्दुस्थानभरमें लाखों-करोड़ों हिन्दू वही
स्तुति गाते हैं जो, हे सिख भाइयों, तुम्हारे पूर्वज 'सिन्धू' उस
नदीके किनारे जहां हमारी संस्कृति और सभ्यताका बीज बोया
गया, गाते थे और गाकर अपनी कृतज्ञता ज्ञापन करते थे।
“अंबितमे नदीतमे। देवितमे सरस्वति !” यह सस्वर मंत्र-
पाठ आज भी होता है। वेद जैसे हमारे हैं वैसे ही सिखोंके भी
हैं। वे वेदोंको अपौरुषेय न मानते हों जैसे हम मानते हैं, यह
बात दूसरी है। पर वेदोंमें भी प्रकृतिकी शक्तियोंको स्वकार्य-
साधनमें लगानेके मनुष्यके प्रथम प्रचंड प्रयत्नका वर्णन है—
स्वर्गीय सुधाको अन्धकारमें कैद कर रखनेवाले और इस तरह
आत्मज्योतिकी किरणोंका प्रकाश मानवी मनसे रोककर चैतन्यको
अचेतन बना रखनेवाले अज्ञानके साथ मनुष्यके तुमुल संग्रामका
वर्णन है;इस नाते वेद उनके लिये भी पूज्य हैं। सिखोंका इतिहास
भी अन्य सब हिन्द-समाजोंके समान. यथार्थमें वेदोंसे ही आरंभ