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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 142, कुल 167 में से

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पृष्ठ 142

१२६ , हिन्दुत्व
गये थे कि संपूर्ण राष्ट्र-शरीरमें एक ही रक्त प्रवाहित होता
था। जहां रूढ़िने विरोध किया वहां स्वयं प्रकृतिने उन बांधोंको
तोड़ डाला। आर्योंमें अकेले भीमसेन ही नहीं हुए जिन्होंने हिडिं-
बासे प्रणय किया हो। भील और संथाल जातिकी दस-बीस लड़-
कियोंमेंसे भी यदि किसी लड़कीको उठाकर किसी कन्यापाठ-
शालामें छोड़ दें तो उसको आकृति या नैतिक संस्कारसे कोई
यह पता लगाना चाहे कि यह किस जातिकी है तो वह नहीं लगा
सकेगा। आर्य, कोलार, द्रविड़ आदि वंशोंके संमिश्रणसे जो
जाति उत्पन्न हुई वह ठीक ही है कि आर्य, कोलार या द्रविड़ न
कहलाकर, हिंदू-जाति कहलाती है—अर्थात् वह जाति जो एक
ही मातृ-भूमिकी संतति और एक ही पुण्यभूकी उपासक है।
इसलिये संथाल, धोवर, भील, पंचम, नमःशूद्र और ऐसी अन्य
सब जातियां हिंदू ही मानी जाती हैं। यह हिंदुस्थान जितना
आर्यों के पूर्वपुरुषोंका देश है उससे यदि अधिक नहीं तो कमसे
कम उतना ही वह उनका भी है। उनमें वही हिंदू-रक्त है, उनमें
वही हिन्दू-संस्कृति है। उनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अभी
किसी कट्टर पुराणप्रिय हिंदू-सम्प्रदायके पूर्ण प्रभावके अन्दर
नहीं आये हैं तौभी वे ऐसे देवताओं और साधु-सन्तोंका नाम
लेते हैं, ऐसे ही "धर्म" का पालन करते हैं जो देवता, साधु
और धर्म-संप्रदाय केवल इसी देशसे सम्बद्ध हैं और इसलिये यह
भूमि उनकी केवल पितृभू नहीं, पुण्यभू भी है।
हिन्दुत्वका जो सांस्कृतिक पहलू है उसपर भी कोई आपत्ति
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