हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिभाषाकी जांच • १२५
लगाते रहें, एक ध्रुवसे दूसरे ध्रुवतक इस समग्र पृथ्वीके
लोगोंको अपने सद्गुणोंसे सम्पन्न करें और अन्य देशोंमें जहां
जो कुछ उत्तम हो उसे लेकर उससे अपने देशको भी समृद्ध करें।
हिन्दुत्व हिमालयके गरुड़ोंके पंख नहीं काटता प्रत्युत उनकी
उड़ानकी शक्तिको बढ़ाता है। जबतक, हे हिन्दू भाइयो, तुम
अपने हिंदुस्थान देशको अपनी पितृ-भू और पुण्यभू मानते हो
और हिन्दू-जातिकी संस्कृति और हिंदू-जातिके रक्तका अभिमान
तुम्हारे अन्दर है, तबतक आगे बढ़े चलो, संसारमें अपने उप-
निवेश कायम किये चलो। हिंदुत्वकी भौगोलिक चतुःसीमा
पृथ्वीकी चतुःसीमा है।
अब हमारी परिभाषामें जाति-संबंधी जो लक्षण है, हम नहीं
समझते कि कोई भी उसपर कोई आपत्ति कर सकता है। जिस
प्रकार इंग्लैंडमें इबेरियन, केल्ट, आंग्ल, सैक्सन, डेन आदि भिन्न
भिन्न लोग, परस्पर विवाह-संबंधी जातीय प्रतिबंधोंके रहते
हुए भी, एक जाति बन गये हैं; उसी प्रकार प्राचीन आर्य, कोलार,
द्राविड़ तथा अन्य लोगोंमें परस्पर-विवाह-संबंधी जातीय प्रति-
बंधोंके रहते हुए भी वे एक जाति हुए हैं और अब वे प्रतिबन्ध
प्रतिबंध नहीं माने जा सकते। हम पिछले परिच्छेदोंमें इस विष-
यका विस्तारके साथ प्रतिपादन करके यह दिखला चुके हैं कि
विवाहके जिन प्रतिलोम और अनुलोम प्रकारोंको हमारे धर्म-
शास्त्रमें स्थान मिला हुआ है उन्हींसे यह प्रमाणित हो जाता
है कि उसी समय ये भिन्न भिन्न वंश एक दूसरेमें इस हदतक मिल