हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअंगरेजी राज्य स्थापित होनेके पूर्व हिन्दुस्थानमें हिन्दुओंका
राज्य था जिसकी स्वाधीनताके लिये वे ११ सौ वर्षतक लड़ते रहे
और लड़कर उन्होंने जिसे फिर पाया। दैवसंयोगसे वह स्वा-
धीनताश्री फिर हरण हुई। पर ११ सौ वर्षका यह इतिहास
संग्रामका इतिहास हैं और इसका फल प्रत्यक्ष है। हिन्दू-जाति
जीवित है। उसकी संस्कृति जीवित है। उसका इतिहास जीवित
है। उसका शुद्ध रक्त वही रक्त है जिसने विक्रम और शालि-
वाहन, दाहिर और अनंगपाल, भीमदेव और पृथ्वीराज, जयपाल
और प्रताप, विद्यारण्य और बुक्कराय, रामदास और शिवाजी, गुरु
गोविन्द और छत्रसाल, बाजीराव और माधवराव, नाना और
महादजीको उत्पन्न किया जिन्होंने हिन्दुत्वकी रक्षाका व्रत अखंड
रखा और जिनके नाम और काम आज भी हिन्दू-जातिको अपने
पवित्र व्रत और अपनी अप्रतिम शक्तिका अमोघ उपदेश देकर उसे
अपने सिंहरूपकी पहचान करा देते हैं। वही हिन्दू-जाति है।
कौन कहता है, हिन्दू कायर हैं? कौन कहता है, हिन्दू-जाति
एक नहीं है? कौन कहता है, हिन्दू दुर्बल हैं? हिन्दुओंका
हिन्दुत्व प्रत्येक हिन्दूकी शक्तिका अखंड स्रोत है। यहां नैराश्य
और भय कहाँ? यहां तो वह अजेय शक्ति है जिसने उस शक्तिको
भी जीत लिया जिसके सामने अरबसे स्पेनतक उस समय कोई
ठहर न सका। यह वह अजेय दैवी शक्ति है जिसे कोई जीत नहीं
सकता; क्योंकि यह शक्ति संसारके संहारके लिये नहीं, संसारके
उद्धारके लिये है—संसारको मनुष्योंके, मनुष्योंकी तरह, रहने-
योग्य बनानेके लिये है।