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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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पृष्ठ 137

हिन्दुत्वकी परिभाषा १२१
अपनी संस्कृति मानता है जो संस्कृति संस्कृत भाषामें संचित
और जातिके इतिहास, साहित्य, कला, धर्मशास्त्र, व्यवहारशास्त्र,
रीति-नीति, विधि-संस्कार, पर्व और त्योहार-इनके द्वारा अभि-
व्यक्त हुई है; और जो इन सब बातोंके साथ इस देशको अपनी
पुण्य-भू, अपने अवतारों और ऋषियोंकी, अपने महापुरुषों और
आचार्योंकी निवास-भूमि तथा सदाचार और तीर्थयात्राकी
भूमि मानता है। हिन्दुत्वके ये लक्षण हैं—एक राष्ट्र, एक जाति,
और एक संस्कृति। इन सब लक्षणोंका अन्तर्भाव करके संक्षेपमें
यों कहा जा सकता है कि हिन्दू वह है जो सिन्धुस्थानको केवल
पितृभू नहीं, पुण्य-भू भी मानता है। हिन्दुत्वके प्रथम दो लक्षण-
राष्ट्र और जाति—"पितृ-भू" शब्दमें आ जाते हैं, और तीसरा
लक्षण—एक संस्कृति—"पुण्य-भू" शब्दसे मुख्यतः प्रकट होता
है, क्योंकि संस्कृतिमें सब संस्कार आ जाते हैं और संस्कृति ही
किसी भूमिको पुण्य-भूमि बनाती है। यह परिभाषा और भी
संक्षिप्त निम्नलिखित अनुष्टुपमें की जा सकती है —
आसिन्धु सिन्धुपर्यन्ता यस्य भारतभूमिका।
पितृ-भूः पुण्य-भूश्चैव स वै हिन्दुरितिस्मृतः ॥