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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 136, कुल 167 में से

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पृष्ठ 136

१२० हिन्दुत्व
यहां जो है वह सब जगह नहीं मिलेगा; यहां जो नहीं है वह
कहीं भी न मिलेगा। संसारमें जो कुछ है, वह यहां मौजूद है।
तुम जो जाति, रक्त, संस्कृति और राष्ट्रीयताके बन्धनोंसे हिन्दू
ही हो और जिसे हिंसाके हाथने ही अपने पितृ-गृहसे जबर्दस्ती
खींच लिया, तुम्हें यही करना है कि अपनी अनन्य भक्ति अपनी
इस माताको अर्पण करो और इसे केवल पितृ-भू नहीं, पुण्यभूमि
मानकर पूंजो और इस तरह फिरसे हिन्दूसंघमें आ जाओ।
हिन्दू-जाति अत्यन्त प्रसन्न चित्तसे तुम्हारा स्वागत करेगी।
बोहरा, खोजा, मेमन तथा अन्य मुसलमानों और ऐसे ही
क्रिस्तानोके लिये यही रास्ता खुला है और यह केवल उनकी
मर्जीपर है कि वे इसे स्वीकार करें या न करें। परन्तु जबतक
वे इस मार्गपर नहीं हैं तबतक हम उन्हें हिन्दू नहीं कह सकते।
यहां यह बात ध्यानमें रखनी चाहिये कि हम हिन्दुत्वके लक्षणों-
की जांच कर रहे हैं और इसलिये किसी पक्ष या पूर्वाग्रहके अनु-
कूल अर्थ निकालनेके लिये विवेच्य विषयके विवेचनमें खींच-तान
करना केवल अन्याय होगा।
तात्पर्य, हिन्दू वही है जो सिन्धु नदीसे सिन्धु-समुद्र पर्यंत
विस्तृत इस देशको अपनी पितृ-भू मानता है; जो रक्त-संबंधसे
उस जातिका वंशधर है जिसका प्रथम उद्गम वैदिक सप्त-सिन्धु-
ओंमें हुआ और जो पीछे बराबर आगे बढ़ती अन्तर्भूतको
पचाती और उसे महनीय रूप देती हिन्दू-जातिके नामसे विख्यात
हुई; जो उत्तराधिकार सम्बन्धसे उसी जातिकी उस संस्कृतिको