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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 134, कुल 167 में से

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पृष्ठ 134

११८ हिन्दुत्व
परायापनकी गन्ध आती है। उनकी निष्ठा बंटी हुई है। उनमें
कुछ लोग जैसा कि कहा करते हैं वैसी ही यदि उनकी निष्ठा हो
तो कोई चारा भी नहीं है—उन्हें अपनी पुण्यभूमि अपनी पितृ-
भूमिसे 'गरीयसी' मानना ही होगा और उसीकी अधिक भावना
औ भक्ति करनी होगी। यह बिलकुल स्वाभाविक है। हम इसी-
लिये उन्हें बुरा नहीं कहते, न इसपर अश्रुपात ही करते हैं। हम
जो बात है उसीको सामने रख रहे हैं। हिन्दुत्वके लक्षण क्या हैं
यह निश्चित करनेका यहां तक प्रयत्न किया। उससे यह मालूम
हुआ कि बोहरा और ऐसे ही अन्य मुसलमान या क्रिस्तानोंमें
हिन्दुत्व-के और सब लक्षण हैं पर एक लक्षण नहीं है—कि वे
हिन्दुस्थानको अपनी पुण्यभू नहीं मानते ।
यहां यह प्रश्न नहीं है कि कौन धर्म अच्छा है और किस
धर्मको मानना चाहिये और न यहां परमात्मा, आत्मा और जीव-
त्माके संबंधमें ही कोई नया सिद्धान्त प्रतिपादित करना है।
कारण, हमारा अन्तःकरणवृत्तिसे ही यह प्रामाणिक विश्वास
है कि हिन्दू तत्वज्ञान—हम किसी संप्रदाय विशेषकी बात नहीं
कहते—हिन्दू तत्वज्ञान—उस पराकाष्ठाको पहुंचा हुआ है कि
मानवी कल्पनाशक्तिमें अब कोई ऐसी बात नहीं रह गयी है कि
उससे अज्ञेयके संबंधमें तो क्या, अज्ञातके संबंधमें भी कोई नई
कल्पना निकल सके अथवा "तत्" और "त्वम्" की कोई नई
मीमांसा हो सके। आप कौन हैं ? एकेश्वरवादी, जगदीश्वरवादी,
निरीश्वरवादी, नास्तिक्यवादी; कौन हैं ? जो कोई हों, यह