हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुत्वकी परिभाषा ११७
बापके सामने उसका वध किया गया और मृतप्राय पिताने
भी हिन्दूधर्मको नहीं छोड़ा, इसलिये उसके मुखमें उसके वीर
तनयका रक्ताक्त हृदय क्रूरतासे ढूंसा गया। यहांके प्रत्येक
स्थान और पाषाणमें किसी न किसी हुतात्माकी पुण्यकथा
संचित हुई है। हे जननी जन्मभूमि ! तेरी प्रत्येक रजःकणिका
यज्ञभूमि हो गयी है। 'जहां कृष्णसार मिलता है', वहीं नहीं,
काश्मीरसे कन्याकुमारीतक समग्र भारतभूमि यज्ञभूमि है, जो
ज्ञानयज्ञ अथवा आत्मयज्ञसे पतितपावनी हुई है। इसलिये
यह भारतभूमि, यह सिन्धुस्थान प्रत्येक हिन्दूके लिये पितृभू है
और पुण्यभू भी।
इसलिये ऐसे मुसलमान और क्रिस्तान जो जबर्दस्ती धर्मच्युत
करके परधर्ममें मिलाये गये और इसलिये अन्य हिन्दुओंके साथ
जिनकी यही मातृपितृभूमि है, हिन्दू-संस्कृतिके अधिक भागको
जो अब भी मानते हैं—जिनकी भाषा, व्यवहार-शास्त्र, रीति-
रस्म, लौकिक मनःसंस्कार और इतिहास अनेकांशमें अन्य
हिन्दुओंके ही समान हैं—ऐसे मुसलमान और क्रिस्तान-“पुण्यभू”
की उपर्युक्त लक्षणमीमांसाके कारण कदापि हिन्दू नहीं
माने जा सकते। कारण अन्य हिन्दुओंके समान उनके लिये भी
हिन्दुस्थान पितृभूमि है पर पुण्यभूमि नहीं है। उनकी पुण्यभू
यहांसे बहुत दूर अरबमें या फिलस्तीनमें है। उनके पुराण और
अवतार, उनकी कथाएं और उनके धर्मवीर इस भूमिके जने
नहीं हैं। और इसलिये उनके नामों और उनकी आकांक्षाओंमें