हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११६ हिन्दुत्व
धरसे चैतन्यतक, रामदाससे राममोहनतक हमारे सब गुरु
और महापुरुष इसी भूमिमें पैदा हुए और इसी भूमिमें पले और
फले फूले। इस भूमिकी रजके प्रत्येक कणसे उनके पदस्पर्शकी
ध्वनि प्रतिध्वनित होती है। इस भूमिकी सब नदियां पवित्र हैं
और उनसे इसकी वनश्री पावन हुई है; कारण, मानवी जीवन,
आत्मा और परमात्मा, ब्रह्म और माया—इन गूढ़तम प्रश्नोंका
परम विचार हमारे परम पूज्य ऋषियों और आचार्योंने इन्हीं
नदियोंके शीतल चन्द्रप्रकाशसे रम्य तटपर अथवा तरुलताओंके
कुञ्जमें बैठकर ही किया था। इस भूमिके प्रत्येक गिरि और
कन्दरामें कपिल और व्यास, बुद्ध और शङ्कराचार्य, शंकर
और रामदासकी स्मृति-समीर बह रही है। कहीं भगीरथने
राज्य किया है, कहीं कुरुक्षेत्र विद्यमान है। कहीं रामचन्द्रके
वनवासका प्रथम प्रस्थान है, कहीं जानकीके सुवर्णमृग-
दर्शनका स्थान है। इस यमुनातटपर खड़े गोपाल कृष्णने अपनी
विश्वविमोहिनी मधुर मुरली बजायी और वहां गोकुलके गोप
उसकी ध्वनिपर आनन्दोन्मत्त होकर नृत्य करने लगे। यहां
बोधिवृक्ष खड़ा है, वहां वह तपोवन है। यहां महावीरने निर्वाण
लाभ किया। वहां गुरु नानककी संगत “गगन थाल रविचंद
दीपक बने” वाली आरती गा रही है। उस राजा गोपीचंदने
राजपाटपर लात मारकर यहीं योगीका वेश लिया और भिक्षा-
पात्र हाथमें ले भगिनीके द्वारपर “मैया, भिक्षा दे” की पुका .
की। यहां बन्दा बहादुरके पुत्रको बोटी बोटी काटकर उसने