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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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हिन्दुत्वकी परिभाषा ११५,
; ही फल-फूल है। हिन्दू-धर्म हिन्दुओंकी नैसर्गिक परिस्थिति
और विचारप्रणालीका ही विकास नहीं बल्कि हिन्दू-संस्कृतिका
ही विकास है। वैदिक कालमें या बौद्ध, जैन आदि संप्रदा-
योंके उदयकालमें अथवा उससे भी आधुनिक चैतन्य, चक्रधर,
बसव, नानक, दयानन्द अथवा राजा राममोहनरायके समयमें
जब-जब जो-जो हिन्दू-धर्ममें विचार-क्रांति हुई, उस प्रत्येक क्रांति-
के समय ज्ञात हुई परमोच्च आनन्दकी अनुभूति जिस भाषा और
जिन लाक्षणिक शब्दोंद्वारा अभिव्यक्त हुई, वह भाषा और वे
शब्द, उनकी कथा और उनका तत्वज्ञान, उनके द्वारा विवादित
और स्वीकृत सिद्धान्त, इन सबपर हिन्दू-संस्कृतिकी ऐसी वज्र-
प्राय छाप लगी हुई है कि वह कभी मिट नहीं सकती। हिन्दू-
धर्मके सब संप्रदाय हिन्दू-संस्कृतिके ही वायुमण्डलमें जनमे हुए हैं
और उसीमें उनकी जीवन-रक्षा और वृद्धि हुई है; उसी प्रकार
प्रत्येक हिन्दूका धर्म उसकी जन्मभूमिसे इतना अभिन्न प्राण है
कि यह भूमि प्रत्येक हिन्दूके लिये केवल पितृभूमि ही नहीं प्रत्युत
पुण्यभूमि भी है।
हां, यह भारतभूमि, यह सिन्धुस्थान, यह हमारा देश
सिन्धुसे सिन्धुतक जो फैला हुआ है, हमारी पुण्यभूमि ही है,
कारण इसी भूमिमें हमारे धर्मप्रवर्त्तक उत्पन्न हुए, इसी भूमिमें
वे ऋषि उत्पन्न हुए जिन्हें वेदमंत्रोंके दर्शन हुए। उन वैदिक
ऋषियोंसे लेकर दयानन्दतक, जिनसे महावीरतक, बुद्धसे
नागसेनतक, नानकसे गोविन्दतक, बंदासे बसवतक; चन्द्र-