हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें॥-
हिन्दू वीर दक्षिणमें तुंगभद्रा नदीके तटपर, उस प्राचीन परम
पुनीत पंपासरोवरके वारिप्रपातरम्य पर्वत-प्रदेशमें हिन्दू-शक्तिके
संघटनके लिये एकत्र होने लगे। सन् १३३५ में “योगेश्वर” श्री
विद्यारण्य स्वामीके उपदेश और “धनुर्द्धर” श्री हरिहर और
बुक्कके पराक्रमसे उस विजयानगर-राज्यकी स्थापना हुई जिसने
हिन्दू-विजयजयंती, हिन्दू-संस्कृति और हिन्दू-धर्मकी रक्षा
की। समग्र हिन्दू-जातिकी ओरसे इस विजयानगर राज्यने
आक्रमण-कारियोंके साथ संग्राम जारी रखा। ढाई सौ वर्ष-
तक इसने अपना काम किया। अन्तको दक्षिणके सब
मुसलमान राज्योंने मिलकर इससे घोर संग्राम किया और
सन् १५६४ में तालिकोटके उस समर-यज्ञमें विजयानगर
राज्यकी आहुति पड़ी—विजयानगर राज्य नष्ट हुआ; पर
मानो उसके चिता-भस्मसे ही, इस संग्रामके ५० वर्ष बाद ही
महाराष्ट्रने हिन्दू-शक्तिकी विजयवैजयन्ती अपने हाथमें ली और
समर्थ रामदास और छत्रपति शिवाजी उत्पन्न हुए जिन्होंने महा-
राष्ट्रको स्वाधीन करके वही संग्राम जारी रखा जो सन् ७१२ में
सिन्धु नदीके तटपर आरंभ हुआ था और एक शताब्दीके अन्दर
ही हिन्दुस्थानमें एक बार फिर “हिन्दूपदपादशाही” स्थापित कर
दी। इसीके सिलसिलेमें आगे सिखोंका उत्थान हुआ और
दक्षिण ओरसे मराठोंने, उत्तरमें सिखोंने और बीचमें राजपूतोंने
हिन्दू राज्य स्थापित करनेका जो अलग अलग उद्योग किया
वह हिन्दुत्वकी रक्षाका ही उद्योग था।