हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११२ हिन्दुत्व
परीक्षा करके विचार-सृष्टिके गुह्यतम रहस्योंका पता लगाकर और
परमानंदके उच्चतम नभोमंडलमें विहार करके एक ऐसा समी-
करण ढूंढ़ निकाला जिससे सत्यकी खोजमें प्रवृत्त प्रत्येक सत्या-
न्वेषीके चित्तका समाधान होता है—चाहे कोई एकेश्वरवादी हो,
द्वैत विश्वासी या अनीश्वरवादी हो। उस समीकरणका ध्येय
सत्य है और उसका साधन आत्मानुभव। वह समीकरण केवल
वैदिक नहीं है, केवल अवैदिक भी नहीं है। वह दोनोंका मेल
है। वह प्रत्यक्ष धर्मका अनुभव-सिद्ध शास्त्र है और वही हिन्दू-
धर्म है। वैदिक, सनातनी, जैन, बौद्ध, सिख—इन सब मतमता-
न्तरोंका एकीकरण करके जो निर्णायक सत्य तत्व निकलते हैं
उन्हीं सत्य तत्वोंका सत्यत्व ही "हिन्दू-धर्म" है। जो जो धर्म-
सिद्धान्त और धर्म-संप्रदाय "सप्तसिन्धु" नामसे विख्यात
भूमिमें तथा भावी विराट् सिन्धुस्थान या हिन्दुस्थानमें उत्पन्न
हुए उन सबका अन्तर्भाव हिन्दूधर्मके अन्दर होता है और वे सब
हिन्दू-धर्मके प्राणभूत अङ्ग हैं।
इस प्रकार "वैदिक धर्म" या "सनातनधर्म" हिन्दू-धर्मके
अन्तर्गत अन्य संप्रदायोंके समान एक संप्रदायमात्र है, फिर उस
संप्रदायको माननेवालोंकी संख्या चाहे कितनी ही बड़ी हो।
हिन्दू-धर्म-विषयक स्वर्गवासी लोकमान्य पण्डित बाल गंगाधर
तिलककी जो
प्रामाण्य बुद्धिर्वेदेषु साधनानामनेकता।
उपास्यानामनियम एतद्धर्मस्य लक्षणम् ॥