हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुत्वकी परिभाषा १११
सप्त सिन्धुओंका वैदिक राष्ट्र अनेक उपजातियों और श्रेणियोंमें
बँटा हुआ था। उस समय बहुजन-समाजका जो धर्म था, हम
उसे सुभीतेके खयालसे वैदिक धर्म कहते हैं, परन्तु उस समय
भी सप्तसिन्धुओंमें ही एक ऐसा अल्प-संख्यक समाज था
जो वैदिक धर्म नहीं मानता था। पण्णी, दास, व्रात्य तथा
और भी अनेक समाज ऐसे थे जो अनेक बार वैदिक धर्मको
माननेसे इन्कार करते थे और कोई कोई तो वैदिक धर्मके
माननेवाले कभी थे ही नहीं। तथापि उन्हें यह चैतन्य था कि
जाति और राष्ट्रके बन्धनसे हम सब एक हैं। वैदिक धर्म नामसे
पुकारा जानेवाला एक धर्म-संप्रदाय उस समय था। परन्तु वैदिक
धर्म और “सिन्धु-धर्म” दोनों चीजें एक नहीं थीं, कारण यदि
“सिन्धु-धर्म” इस नामकी सृष्टि उस समय की जाती तो उस
नाममें स्वभावतः ही केवल वैदिक धर्म नहीं, प्रत्युत उन सब
धर्मोंका अन्तर्भाव होता जो सप्तसिन्धु-प्रदेशमें उस समय विद्यमान
थे। इष्टका समावेश और अनिष्टका त्याग करनेकी रीतिसे
सिन्धुओंकी जाति बढ़ती-बढ़ती विशाल हिन्दू-जाति हुई और
सिन्धुओंका स्थान—सिन्धुस्थान—बढ़ता-बढ़ता हिन्दुओंका
स्थान-हिन्दुस्थान बन गया। इस जातिके वैदिक तथा अवैदिक
मतोंके प्रवर्तकोंने अनेक अनुभव प्राप्त करके अनेक तत्वोंका
आविष्कार करके और अनेक वस्तुओंका ज्ञान संपादन करके
निम्नतमसे उच्चतमतक, अणुसे आत्मातक, परमाणुसे पर-
ब्रह्मतक संपूर्ण चराचर सृष्टिकी तत्कालसंभव चिकित्सा और