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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 124, कुल 167 में से

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पृष्ठ 124

१०८ . हिन्दुत्व
है जब हिन्दुत्वके लक्षण निश्चित करके यह सम्यक् रूपसे जाना
जाय कि “हिन्दू कौन है?” और यहां हमें हिन्दुत्वके उन लक्षणों-
को देखना है जिनसे हम यह जान सकें कि हिन्दू कौन है; अर्थात्
हिन्दू-धर्मके लक्षणोंकी चर्चा इस प्रबंधकी मर्यादाके बाहरका
विषय है। यहां उसका उतने ही अंशमें विचार करना होगा जितने
अंशमें प्रस्तुत प्रतिपाद्य विषयके साथ उसका संबंध है। हिन्दू-धर्म
किसी एक धर्म-सम्प्रदायका नाम नहीं प्रत्युत उन सब संप्र-
दायोंका समष्टिरूप नाम है जो संप्रदाय अपनेको हिन्दू मानते
हैं। परन्तु साधारणतः “हिन्दू-धर्म” इन शब्दोंका प्रयोग उस
धर्म-संप्रदायके लिये किया जाता है जिसे हिन्दुओंमेंसे अधि-
कांश लोग मानते हैं। यह स्वाभाविक है कि किसी धर्म-संप्रदाय,
देश या जातिका नाम उस धर्म, देश या जातिके किसी ऐसे
विशिष्ट स्वरूपपर रखा जाय जिस स्वरूपको अधिकांश लोग
मानते हैं। नित्यके व्यवहारमें इससे बड़ा सुभीता भी होता
है। परन्तु इस प्रकारसे कोई नाम सुभीतेका होनेपर भी यदि
उससे भ्रम फैलता हो, हानि होती हो तो केवल सुभीतेके ख्याल-
से अपनी न्यायान्याय-विवेक-बुद्धिको अन्ध न होने देना चाहिये।
हिन्दुओंमें अधिकांश लोग “श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त धर्म” अथवा
“सनातनधर्म” नामसे जो पुकारा जाता है उस धर्मके मानने-
वाले हैं। इस धर्मको यदि “वैदिकधर्म” कहें तो इसमें भी कोई
आपत्ति नहीं हो सकती। परन्तु, इस बहुजन-समाजके अतिरिक्त
ऐसे भी कुछ हिन्दू हैं जो कुछ पुराणोंको सर्वथा या अंशतः नहीं