सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 122, कुल 167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 122

[१०६] हिन्दुत्व

पर इन्हें कसनेका प्रयत्न किया जाता है उनमें कोई अव्याप्ति दोष
हो, बल्कि इसलिये कि ये जातियां उन बातोंको धर्म ही नहीं
मानतीं जिनपर ये लोग अपने मनसे ही हिन्दू-धर्मकी छाप लगाना
चाहते हैं ! “हिन्दू कौन है ?” इस प्रश्नका उत्तर देनेकी यह
सचमुच ही उलटी रीति है और इससे सिख, जैन, देवसमाजी,
यहांतक कि देशाभिमानी और प्रगतिशील आर्य-समाजियोंको
भी मनःक्षोभ होता है ।
हिन्दू कौन है ? —वही जो हिन्दू-धर्म मानता है। बहुत ठीक।
पर हिन्दू-धर्म क्या है ? वे तत्व और नियम जिन्हें हिन्दू
मानते हैं ! परन्तु इस तरह इस प्रश्नको हल करना तो एक चक्कर-
के पीछे चक्कर लगाना है। इससे कोई निर्णय नहीं हो सकता ।
इस तरह भटके हुए बहुतसे लोग लौटकर आके कहते हैं, “हिन्दू
तो कोई है ही नहीं” ! जिस अंगरेजने ‘हिन्दूइज्म’ शब्द गढ़ा
वैसी ही बुद्धि रखनेवाला कोई अंगरेज यदि “इंग्लिशिज्म” शब्द
गढ़े और अंगरेज-जातिके अन्दर उस “इंग्लिशिज्म (आंग्ल-धर्मके)”
शब्दाधारपर अंगरेजोंके सर्वसामान्य धर्मसिद्धान्तोंकी जांच करने
निकले और त्रिमूर्तिके तत्वसे लेकर उपयुक्तताके तत्वज्ञानतक
और ज्यू लोगोंसे जैकोबिन लोगोंतक अनेक मतों और पंथोंको
देख घबरा जाय और निराश होकर यह कहे कि, “न ! अंगरेज
तो कोई इस पृथ्वी-तलपर है ही नहीं” ! ऐसा कहनेवाला
अंगरेज जितना हास्यास्पद होगा उतना ही हास्यास्पद वह
हिन्दू भी है जो कहता है कि, “हिन्दू तो कोई मनुष्य-समाज ही