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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 11, कुल 167 में से

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पृष्ठ 11

की। हिंदूपति पृथ्वीराजके तेजस्वी खड्गने समरमें यवन-सेनाका
संहार करके महम्मदको कैद किया। इसने पृथ्वीराजसे अपने
प्राणोंकी भिक्षा माँगी। हिंदूपतिने उसे छोड़ दिया। पर इस कृतघ्न-
ने अपना वचन भंग करके सन् ११६३ में फिर हिन्दुस्थानपर
अकस्मात् आक्रमण कर दिल्लीका सिंहासन भ्रष्ट किया! इस तरह
लगातार ६ सौ वर्ष लड़नेके पश्चात् हिन्दुस्थान परतंत्र हुआ!
संसारमें कौनसी ऐसी जाति है जो अपनी स्वतंत्रताके लिये पीढ़ी
दर पीढ़ी लगातार ६ शताब्दियोंतक रणचण्डीको अपने पुत्रोंकी
भेंट चढ़ा सकी हो? पर यह संग्राम यहीं समाप्त नहीं हुआ।
पृथ्वीराजकी हारके पश्चात् १०० वर्षतक मुसलमान दक्षिण-
भारतमें प्रवेश नहीं कर सके। १२६३ में अलाउद्दीनने दक्षिणपर
चढ़ाई की। असावधान और असंघटित यादव-राज्य यवन-कूट-
नीतिको न समझकर पहली ही चढ़ाईमें छिन्न-भिन्न हो गया।
यादवराज रामदेवरावने दिल्लीके बादशाहका प्रभुत्व स्वीकार
किया। पर हिंदुओंको यह स्वीकार नहीं था। रामदेवरावके
पुत्र शंकरदेवने हिन्दू-स्वातंत्र्यका झंडा फहराया और यवनसेनासे
लड़कर समरांगणमें अपना शरीर छोड़ा। यादवराजकी राजधानी
देवगिरि मुसलमानोंके अधिकारमें गयी और महाराष्ट्र पराधीन
हुआ! पर फिर रामदेवरावके जामाता हरपालदेवने महाराष्ट्रको
स्वाधीन किया। मुसलमानोंसे युद्ध जारी ही था। सन् १३१८ में
हरपालदेव मारा गया। देवगिरिका राज्य नष्ट हुआ, पर हिन्दू-
वीर्य नष्ट नहीं हुआ। दक्षिण-भारतके राज्यभ्रष्ट हिन्दू राजा और