हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दुत्वके तीन लक्षण १०१
का प्रवाह राष्ट्र-शरीरमें सदा ही प्रवाहित रहा करता था।
इन यात्राओं और मेलोंमें बहुतसी ऐसी बातें हैं जिन्हें कुछ लोग
शास्त्र और धर्म समझकर और कुछ लोग सामाजिक उत्सवके
प्रसङ्ग जानकर पालन करते हैं। पर सबके हृदयपर इन मेलों
और यात्राओंके जिस तत्वकी छाप लग जाती है वह तत्व यही
है कि हमारा जीवन सर्वसम्पन्न होनेके लिये यदि कोई बात
अत्यन्त प्रयोजनीय है तो वह इस समय हिन्दू-जातिके अखण्ड
और एकीभूत जीवनका ही अस्तित्व है।
संक्षेपमें ये ही बातें हैं—प्रतिपाद्य विषय इसके आगे बढ़ने भी
नहीं देता—जो हमारी संस्कृतिके आधारभूत तत्वकी बातें हैं और
जिनके कारण हमारी सांस्कृतिक एकता सिद्ध है। हम हिन्दू
केवल एक राष्ट्र और केवल एक जाति ही नहीं हैं, बल्कि इन
दोनों बातोंके फलस्वरूप हमारी एक ही संस्कृति भी है जिसकी
अभिव्यक्ति और रक्षा, मुख्यतः और मूलतः, संस्कृतके द्वारा हुई है,
जो संस्कृत हमारी जातिकी सच्ची जन्मभाषा है। प्रत्येक मनुष्य
जो हिन्दू है इस संस्कृतिका उत्तराधिकारी है, और उसका
आध्यात्मिक जन्म इसी संस्कृतिसे होता है जैसे उसका भौतिक
जन्म उसकी जन्मभूमि और पूर्वजोंके रक्तसे होता है।
अतएव हिन्दू वह है जो सिन्धुसे सिन्धुपर्यन्त फैले हुए इस
देशको अपना पितृदेश मानकर पूजता हो; जिसके शरीरमें उस
महान् जातिका रक्त प्रवाहित हो रहा हो जिसका मूल वैदिक
सप्तसिन्धुओंमें सर्वप्रथम देख पड़ता है और जो “हिन्दू” नामसे