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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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पृष्ठ 116

१०० हिन्दुत्व
हम हिन्दुओंके उत्सव और त्योहार एक हैं। हमारे विधि
और संस्कार एक हैं। दशहरा और दिवाली, रक्षा-बन्धन और
होलीका, जहां जहां हिन्दू हैं, वहां वहां सानन्द स्वागत है।
दिवालीके दिन, चाहे कोई सिख हो या जैन, ब्राह्मण हो या पंचम,
समग्र हिन्दू-जाति आनन्दोत्फुल्ल हो उठती है; और यह केवल
हिन्दुस्थानमें ही नहीं, बल्कि उस बृहत् हिन्दुस्थानमें भी जो
संसारके सब देशोंमें अपने पैर फैला रहा है। तराईके जंगलतकमें
एक कुटी भी ऐसी दिखायी न देगी जिसने उस दिन दीप-
दान न किया हो। उसी प्रकार राखीबन्धनके दिन पंजाबकी
प्रसन्नवदना कुमारिकाओंसे लेकर मद्रासके कर्मनिष्ठ ब्राह्मणोंतक
सबके हृदयमें प्रेमका समुद्र उमड़ आता है और एक दूसरेके हाथ-
में राखी बांधते हुए वे सच ही कहते हैं, "भाई भाई एक ठाईं।
भेद नाई भेद नाई ॥" फिर भी हमने उन धार्मिक मनःसंस्कारों-
का यहां उल्लेख भी नहीं किया जो हम सबके समान मनः-
संस्कार हैं, अथवा किसी रीति-नीतिका भी धार्मिक विशिष्टताकी
दृष्टिसे विचार नहीं किया; कारण, हिन्दुत्वके मूलभूत तत्वोंका
विचार किसी धार्मिक दृष्टिसे नहीं बल्कि जातीय दृष्टिसे ही
करना था, तथापि राष्ट्रीय अथवा जातीय दृष्टिसे भी हमारे ये
भिन्न भिन्न तीर्थस्थान हमारी जातिकी सर्वसामान्य परंपरागत
संपत्ति हैं यह स्पष्ट है। जगन्नाथकी रथ-यात्रा, अमृतसरकी
वैशाखी, कुंभ और अर्धकुंभी ये सब हम लोगोंके सच्चे और
जीवित महासम्मेलन ही थे और उनसे हमारे जीवन और विचारों-