हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरखिये, साथ ही शेक्सपियरकी; और उससे पूछिये कि इनमें
तुम्हारा कौन है । वह यही कहेगा कि, “रवीन्द्र ! रवीन्द्र मेरे हैं।”
कलाकौशल और वास्तुविद्याके जितने काम हैं वे सब भी
हमारी जातिकी समान संपत्ति हैं, चाहे उनमेंसे कोई वैदिक काल-
के कलादर्शका द्योतक हो या कोई अवैदिक आदर्शका । कारण
जिन मजूरों द्वारा ये तैयार कराये गये, जिन मालिकोंने उनसे ये
काम कराये, जिन करदाताओंने इनके लिये धन दिया और जिन
राजाओंने इन कामोंको आरंभ कराया और उनका प्रबंध किया,
वे वैदिक रहे हों या अवैदिक, थे इसी महान् हिन्दू-जातिके
जिसका वासस्थान सिन्धुसे सिन्धुपर्यन्त यह सारा हिन्दुस्थान
है । आज जो सनातनी हैं उन्होंने ही बौद्धकालमें बौद्धोंके:
स्तूप, विहार और भवन निर्माण करनेमें मिहनत-मजूरी और
धनसे सहायता की; और उस समय जो बौद्ध थे उन्होंने ही अब
सनातनधर्मकी मूर्तियां और मन्दिर निर्माण करनेमें हाथ
लगाया ।
छोटी छोटी बातोंमें चाहे परस्पर कितनी ही भिन्नता क्यों न
हो, हम सब हिन्दुओंके समान संस्कार और आचार-विचार रहे
हैं और उनका नियामक नियम भी एक ही रहा है। ये संस्कार-
आचार-विचार और यह नियम ये ही दो बातें हम सब हिन्दुओं-
की मूलभूत एकताके कार्य और कारण दोनों हैं। हिन्दू-व्यवहार-
शास्त्रके आधारपर बना हुआ हिन्दू-धर्मशास्त्र, आपाततः
उसमें अनेक भेद और यत्र-तत्र परस्पर विरोध होनेपर भी, इतना