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सर्वकोश
हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 113, कुल 167 में से

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पृष्ठ 113

हिन्दुत्वके तीन लक्षण
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। हम सबके मनोविकारों और आकांक्षाओंको स्फूर्त्ति और
प्रोत्साहन देकर एक ही आदर्शकी ओर गति देनेवाली यही
मर्मस्थ ज्ञानशलाका है। यह केवल भाषा नहीं है, बहुतोंके लिये
यह मंत्र है और सबके लिये यह सङ्गीत है। सब जैन वेदोंको
सर्वथा प्रमाण नहीं मानते। पर वेद सबसे प्राचीन ग्रन्थ और
जैनोंकी जननि-जातिके इतिहास होनेसे, उन वेदोंको अपने कहने-
का जितना अधिकार अन्य हिन्दुओंको है उतना ही जैनोंको भी
है। आदिपुराण किसी सनातनी कविका लिखा नहीं है, पर जैन
और सनातनी दोनोंकी यह समान संपत्ति है। बसव पुराण
लिंगायतोंका मुख्य धर्मग्रन्थ है; पर यह कन्नड़ भाषाका सर्वश्रेष्ठ
तथा ऐतिहासिक ग्रन्थ होनेसे इसपर जितना लिङ्गायतोंका
अधिकार है उतना ही अन्य हिन्दुओंका भी। गुरु गोविन्दसिंहके
"विचित्र नाटक" पर बङ्गालके हिन्दुओंका जितना अधिकार है
उतना ही “चैतन्यचरितामृत” पर सिक्खोंका अधिकार है। कालि-
दास और भवभूति, चरक और सुश्रुत, आर्यभट्ट और वराहमिहिर,
भास और अश्वघोष, जयदेव और जगन्नाथ—इन्होंने जो रचनाएं
कीं वे हम सबके लिये कीं, वे हम सबका हृदय अपनी ओर खींचती
हैं और वे हम सबकी संपत्ति हैं। बंगालके किसी हिन्दूके
सामने तमिल भाषाके कवि कंबकी कोई रचना रखिये और
साथ ही हाफिजकी कोई किताब रखिये और उससे पूछिये कि
इन दोनोंमें तुम्हारी चीज कौनसी है तो वह कहेगा, "कंब कवि
मेरे हैं।" महाराष्ट्रके किसी हिन्दूके सामने रवीन्द्रनाथकी रचना