हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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चले आ रहे हैं उनका क्या जवाब है ? फिर भी ये एक एक राष्ट्र
हैं और इनका एक एक ही इतिहास है। यदि इनके लिये यह बात
है तो हिन्दुओंकी भी वही बात है। और यदि हिन्दुओंका एक
इतिहास न हो तो संसारमें किसीका भी एक इतिहास नहीं है।
जिस प्रकार इतिहाससे हमें अपनी जातिके पराक्रमोंका
पता चलता है उसी प्रकार अपने साहित्यके सायन्त इतिहास-
से अपनी जातिके विचारोंका आदर्श सामने उपस्थित होता है।
विचार शब्दसे अभिन्न कहा जाता है, और हमारा साहित्य
संस्कृत भाषासे अभिन्न है और इसलिये संस्कृत ही हमारी जन्म-
भाषा है। इसी भाषामें हमारी माताएं बोलती थीं और इसी
भाषासे हमारी सभी वर्तमान भाषाएं निकली हुई हैं। हमारे
देवता संस्कृतमें बोलते थे, हमारे ऋषि संस्कृतमें विचार करते
थे, हमारे कवि संस्कृतमें काव्य करते थे। हम लोगोंमें जो जो
कुछ उत्तम है—उत्तम विचार, उत्तम कल्पना, उत्तम सुभाषित—
वह सब संस्कृतमें ही प्रकट होना चाहता है। करोड़ों मनुष्य अब
भी यही समझते हैं कि हमारे देवता सदा इसी भाषामें बोलते
हैं; अन्य लोग यह समझते हैं कि यह हमारे पूर्वजोंकी भाषा है;
और सब लोग एक मत होकर यही मानते हैं कि यह सर्वोत्तम
भाषा है, यह हम सबकी परम्परासे प्राप्त संपत्ति है, यही हमारी
जमा है और इसीसे गुजराती और गुरुमुखी, सिन्धी और हिन्दी,
तामिल और तेलगु, मराठी और मलयालम्, बङ्गाली और सिंहाली
ये सब एक ही जननीके उदरसे निकली हुई भाषाएं, संपन्न हुई