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हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)

Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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हिन्दुत्वके तीन लक्षण ६५
जीवनचरित पढ़ते हैं तो मुंहसे यह उद्गार निकलता है कि
“देखिये, कैसे देशभक्त हैं ये लोग !” पर जब माधवाचार्यका
जीवनचरित पढ़ते हैं तो यही कह उठते हैं, "हमलोगोंमें इतनी
देशभक्ति और इतनी प्रचण्ड शक्ति है।" पृथ्वीराजकी हारपर
बङ्गाल विलाप करता है; गुरु गोविन्द सिंहके शहीद बच्चोंका हाल
पढ़कर महाराष्ट्रका कंठ रूध जाता है ! उत्तर भारतका आर्य-
समाजी इतिहासकार यह अनुभव करता है कि हरिहर और बुक्क
हमारे लिये लड़े थे; वैसे ही दक्षिण भारतका सनातनी यह अनु-
भव करता है कि गुरु तेगबहादुरने हमारे लिये अपनी जान दी
थी । हमारे राजा एक थे, हमारे राज्य एक थे ; हमारी स्थिति
एक थी, हमारी गति एक थी ; हमारी हार एक थी, हमारी जीत
एक थी । मोकाबसय्या और पिसाल, जयचंद और कालापहाड़
हम लोगोंमें पैदा हुए इससे हम सबकी ही एक साथ गर्दन
झुकती है । अशोक, भास्कराचार्य्य, पाणिनी और कपिलके नाम
हम सबमें चैतन्य उत्पन्न कर देते हैं, उनसे हम अपनेको धन्य
समझते हैं ।
इसपर, कहनेवाले कहेंगे कि हिन्दू हिन्दुओंके बीच आपसकी
लड़ाइयां भी होती रही हैं ! हमारा जवाब यह है कि आपसकी
लड़ाइयां नहीं हुईं किस जातिके अन्दर ? क्या अङ्गरेजोंमें आप-
सकी लड़ाइयां नहीं हुईं ? इटली, जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका आदि
देशोंमें एक राज्य दूसरे राज्यसे, एक पन्थ दूसरे पन्थसे, एक
श्रेणीके लोग दूसरी श्रेणीके लोगोंसे जो अभीतक लड़ते-भिड़ते