हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर - रत्नागिरि जेल में रचित वैचारिक ग्रन्थ)
Hindutva: Who is a Hindu? by Veer Savarkar
स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा
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गीत सुनता है वह सती सीताका गीत है। हमलोगोंमें कुछ
लोग रामचन्द्रको ईश्वरका अवतार मानते हैं, कुछ उन्हें एक
महापुरुष और वीराग्रणी मानते हैं और सब लोग उन्हें अपनी
जातिका अत्यन्त प्रसिद्ध सार्वभौम राजा मानते हैं। हनुमान और
भीमसेन प्रत्येक युवकके लिये अखंड बलदायी और शारीरिक
उन्नतिके आदर्श देवता हैं। सावित्री और दमयन्ती प्रत्येक हिन्दू
स्त्रीके अखंड पातिव्रत और अकलंक प्रेमके ध्येय हैं। गोकुलके
उस ग्वालपर राधाने जो प्रेम किया उसकी प्रतिध्वनि, जहां जहां
हिन्दू-प्रेमी अपनी प्रेमिकाको आलिङ्गन करता है, वहां वहां
उत्थित होती है। कौरव-पांडवोंका महायुद्ध, कर्णार्जुन और
भीम-दुश्शासनके तुमुल द्वंद्व हजारों वर्ष पहले कुरुक्षेत्रमें हुए थे,
पर आज भी एक झोपड़ीसे लेकर महान् राजप्रासादतक हृदयको
विचलित कर देनेवाले रसोंके साथ उन युद्धोंके गीत गाये जाते
हैं। अभिमन्यु अर्जुनको जितना प्रिय चाहे न भी हो, उतना प्रिय
आज हम लोगोंमेंसे प्रत्येक व्यक्तिको है। कन्याकुमारीसे काश्मी-
रतक, उस कमलनेत्र बालवीरके युद्धमें पतन होनेकी वार्ता सुन-
कर अर्जुनने जिस व्याकुलताके साथ क्रन्दन किया होगा, उसी
व्याकुलताके साथ आज भी समग्र हिन्दुस्थान रोकर अश्रुपात
करता है। इससे अधिक और क्या कहें ? मुट्ठीभर बालूके कणों-
की तरह हमें यदि कोई दशों दिशाओंमें फेंककर तितर-बितर कर
दे तौभी अकेले रामायण और महाभारत ये दोही ग्रन्थ हमें
फिरसे एकत्र करके एक जाति बना सकते हैं। हम मेजिनीका